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भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary

श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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२६. प्रेम के उद्दीपन १८० २७. प्रेम के लक्षण (अनुभाव) १८६ २८. सात्त्विक भाव १९३ २९. कृष्णप्रेम के व्यभिचारी भाव २०२ ३०. कृष्णप्रेम के अन्यान्य भाव २१३ ३१. अन्य व्यभिचारी भाव २२६ ३२. स्थायिभाव के लक्षण २३४ ३३. भाव के गौण लक्षण २३८ ३४. भक्तिरसामृत २४० पश्चिम विभाग ३५. शान्तरस २४५ ३६. प्रीतिभक्तिरस २५२ ३७ श्रीकृष्णसेवा के उद्दीपन २६० ३८. निर्वेद तथा वियोग २६६ ३९. श्रीकृष्ण से योग के प्रकार २७० ४०. श्रीकृष्ण के मित्र तथा अन्य लाल्याभिमानियों की गौरव प्रीति २७३ ४१. सख्यभक्तिरस २७८ ४२. सख्यरस में प्रेम के व्यवहार २८७ ४३. वत्सलभक्तिरस २९८ ४४. मधुरभक्तिरस ३१० उत्तर विभाग ४५. हास्य भक्तिरस ३१६ ४६. अद्भुतभक्तिरस और वीरभक्तिरस ३२० ४७. करुणभक्तिरस और रौद्रभक्तिरस ३२७ ४८. भयानक तथा बीभत्स भक्तिरस ३३२ ४९. रसों की मैत्री—वैर स्थिति ३३६ ५०. रसों की मैत्री—वैर स्थिति (२) ५१. रसाभास ३४८ ५२. विज्ञाप्ति ३५२