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वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya

by भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य

Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)

DevanagariSanskritpublished486 pages

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ॐ श्रीपरमात्मने नमः वेदान्त-दर्शन ( ब्रह्मसूत्र ) ( साधारण भाषा-टीकासहित ) पहला अध्याय पहला पाद अथातो ब्रह्मजिज्ञासा ॥ १ । १ । १॥ अथ = अब; अतः = यहाँसे; ब्रह्मजिज्ञासा = ब्रह्मविषयक विचार (आरम्भ किया जाता है)। व्याख्या—इस सूत्रमें ब्रह्मविषयक विचार आरम्भ करनेकी बात कहकर यह सूचित किया गया है कि ब्रह्म कौन है? उसका स्वरूप क्या है? वेदान्तमें उसका वर्णन किस प्रकार हुआ है?—इत्यादि सभी ब्रह्मविषयक बातोंका इस ग्रन्थमें विवेचन किया जाता है। सम्बन्ध— पूर्व सूत्रमें जिस ब्रह्मके विषयमें विचार करनेकी प्रतिज्ञा की गयी है, उसका लक्षण बतलाते हैं— जन्माद्यस्य यतः ॥ १ । १ । २ ॥ अस्य = इस जगत्के; जन्मादि = जन्म आदि (उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय); यतः = जिससे (होते हैं, वह ब्रह्म है)। व्याख्या—यह जो जड-चेतनात्मक जगत् सर्वसाधारणके देखने, सुनने और अनुभवमें आ रहा है, जिसकी अद्भुत रचनाके किसी एक अंशपर भी विचार करनेसे बड़े-बड़े वैज्ञानिकोंको आश्चर्यचकित होना पड़ता है,