वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya
by भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य
Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)
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Read in contextसूत्र ३१ ] अध्याय ३ ३४१ होता है, उसके साथ यात्रोपयोगी आवश्यक सामग्री रहती है; उसी प्रकार उपर्युक्त अधिकारी पुरुषके लिये दिव्य शरीर आदि उपकरणोंका वर्णन किया गया है, इसलिये उसका इस लोकसे ब्रह्मलोकमें जानेका कथन उचित ही है। सम्बन्ध - 'ब्रह्मविद्याका फल बताते हुए श्रुतिने बहुत जगह ब्रह्मलोकमें जानेकी बात तो कही है, परंतु देवयानमार्गसे जानेकी बात सर्वत्र नहीं कही है। इसलिये यह जिज्ञासा होती है कि ब्रह्मलोकमें जानेवाले सभी ब्रह्मवेत्ता देवयानमार्गसे ही जाते हैं, या जिन-जिन विद्याओंके प्रकरणमें देवयानमार्गका वर्णन है, उन्हींके अनुसार उपासना करनेवाले पुरुष उस मार्गसे जाते हैं?' इसपर कहते हैं- अनियमः सर्वेषामविरोधः शब्दानुमानाभ्याम् ॥ ३ । ३ । ३१ ॥ अनियमः = ऐसा नियम नहीं है कि उन्हीं विद्याओंके अनुसार उपासना करनेवाले देवयानमार्गद्वारा जाते हैं; सर्वेषाम् = अपितु ब्रह्मलोकमें जानेवाले सभी साधकोंकी गति उसी मार्गसे होती है (यही बात); शब्दानुमानाभ्याम् = श्रुति और स्मृतियोंसे सिद्ध होती है (इसलिये); अविरोधः = कोई विरोध नहीं है। व्याख्या - श्रुतिमें कई जगह साधकको ब्रह्मलोक और परमधामकी प्राप्ति बतलायी गयी है, परंतु सब जगह देवयानमार्गका वर्णन नहीं है। उसी प्रकार श्रीमद्भगवद्गीता आदि स्मृतियोंमें भी सब जगह मार्गका वर्णन नहीं है। अतः जहाँ ब्रह्मलोककी प्राप्ति बतलायी गयी है, वहाँ यदि मार्गका वर्णन न हो तो भी अन्य श्रुतियोंके वर्णनसे वह बात समझ लेनी चाहिये; क्योंकि ब्रह्मलोकमें गमन होगा तो किसी-न-किसी मार्गसे ही होगा। अतः यह नियम नहीं है कि जिन प्रकरणोंमें देवयानका वर्णन है, उसके अनुसार उपासना करनेवाले ही उस मार्गसे जाते हैं, दूसरे नहीं। अपितु जिनका ब्रह्मलोकमें गमन कहा गया है, वे सभी देवयानमार्गसे जाते हैं, ऐसा माननेसे श्रुतिके कथनमें किसी प्रकारका विरोध नहीं आयेगा। यहाँ यह भी समझ लेना चाहिये कि जो यहीं परमात्माको प्राप्त हो जाते हैं, वे ब्रह्मलोकमें नहीं जाते।