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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन

DevanagariHindipublished213 pages

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१४।१८ ] बुद्धवग्गो [ ८९ ( तान् तादृशान् पूजयतो निर्वृतान् अकुतोभयान् । न शक्यं पुण्यं संख्यातुं एवम्मात्रमपि केनचित् ॥ १८ ॥) अनुवाद—पूजनीय बुद्धों, अथवा ( उनके ) अनुगामियों—जो संसार को अतिक्रमणकर गये हैं, जो शोक भयको पारकर गये हैं—की पूजाके, ( या ) उन ऐसे मुक्त और निर्भय (पुरुषों) की पूजाके, पुण्यका परिमाण "इतना है"—यह नहीं कहा जा सकता । १४-बुद्धवर्ग समाप्त