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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन

DevanagariHindipublished213 pages

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१६।११ ] पियवग्गो [ ९९

अनुवाद—तृष्णासे शोक उत्पन्न होता है० । राजगृह (वेणुवन) पाँच सौ बालक २१७–सीलदस्सनसम्पन्नं धम्मट्ठं सच्चवादिनं । अत्तनो कम्म कुब्बानं तं जनो कुरुते पियं ॥६॥ ( शीलदर्शनसम्पन्नं धर्मिष्ठं सत्यवादिनम् । आत्मनः कर्म कुर्वाणं तं जनः कुरुते प्रियम् ॥९॥ ) अनुवाद—जो शील (=आचरण) और दर्शन (=विद्या) से सम्पन्न, धर्ममें स्थित, सत्यवादी और अपने कामको करनेवाला है, उस (पुरुष) को लोग प्रेम करते हैं । जेतवन (अनागामी) २१८–छन्दजातो अनक्खाते मनसा च फुटो सिया । कामेसु च अप्पटिबद्धचित्तो उद्धंसोतो 'ति वुच्चति ॥१०॥ ( छन्दजातोऽनाख्याते मनसा च स्फुरितः स्यात् । कामेषु चाऽप्रतिबद्धचित्त ऊर्ध्वस्रोता इत्युच्यते ॥१०॥ ) अनुवाद—जो अकथ्य (-वस्तु=निर्वाण) का अभिलाषी है, (उसमें) जिसका मन लगा है, कामो(=भोगों) में जिसका चित्त बद्ध नहीं, वह ऊर्ध्वस्र्रोत कहा जाता है । ऋषिपत्तन नन्दियपुत्त २१६–चिरप्पवासिं पुरिसं दूरतो सोत्थिमागतं । ञातिमित्ता सुहज्जा च अभिनन्दन्ति आगतं ॥११॥