धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन
DevanagariHindipublished213 pages
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१० ] धम्मपदं [ १।२० ( अल्पामपि संहितां भाषमाणो धर्मस्य भवत्यनुधर्मचारी । रागं च द्वेषं च प्रहाय मोहं सम्यक् प्रजानन् सुविमुक्तचित्तः। अनुपादान इह वाऽमुत्र वा, स भागवान् श्रामण्यस्य भवति ॥२०॥) अनुवाद-चाहे अल्पमात्र ही सहिताका भाषण करे, किन्तु यदि वह धर्मके अनुसार आचरण करनेवाला हो, राग, द्वेष, और मोहको त्यागकर, अच्छी प्रकार सचेत और अच्छी प्रकार मुक्तचित्त हो, यहाँ और वहाँ (दोनों जगह) बटोरनेवाला न हो; (तो) वह श्रमणपनका भागी होता है । १-यमकवर्ग समाप्त