भारतकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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१।२० ] यमकवग्गो [ ९ श्रावस्ती ( जेतवन ) दो मित्र भिक्षु १६—बहुंपि चे संहितं१ भासमानो , न तक्करो होति नरो पमत्तो । गोपो 'व गावो गणयं परेसँ , न भागवा सामञ्ञस्स होति ॥१६॥ ( बह्वीमपि संहितां भाषमाणः, न तत्करो भवति नरः प्रमत्तः । गोप इव गा गणयन् परेषां, न भागवान् श्रामण्यस्य भवति ॥१९॥ अनुवाद—चाहे कितनी ही संहिताओ (=धर्मग्रंथो ) का उच्चारण करे, किन्तु प्रमादी बन, (जो) नर उसके (अनुसार ) (आचरण) करनेवाला नहीं होता ; (वह) दूसरेकी गायोको गिननेवाले ग्वालेकी भाँति श्रमणपन (=संन्यासी- पन ) का भागी नहीं होता । २०—अप्पम्पि चे संहितं भासमानो , धम्मस्स होति अनुधम्मचारी । रागञ्च दोसञ्च पहाय मोहं , सम्मप्पजानो सुविमुत्तचित्तो । अनुपादियानो इध वा हुरं वा , स भागवा सामञ्ञस्स होति ॥२०॥ १ संहित ।

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