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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन

DevanagariHindipublished213 pages

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१२ ] धम्मपदं [ २।५

अनुवाद—प्रमाद (=आलस्य ) न करना अमृतपद है, और प्रमाद ( करना ) मृत्युपद । अप्रमादी ( वैसे ) नहीं मरते, जैसे कि प्रमादी मरते हैं। पंडित लोग अप्रमादके विषयमें इस प्रकार विशेषतः जान, आर्योंके आचरणमें रत हो, अप्रमादमें प्रमुदित होते हैं। (जो) वह निरन्तर ध्यानरत निश्चय दृढ़ पराक्रमी हैं, वह धीर अनुपम योग-क्षेम ( आनन्द मंगल ) वाले निर्वाणको प्राप्त करते हैं । राजगृह ( वेणुवन ) कुम्भघोसक २४—उट्ठानवतो सतिमतो सु चिकम्मस्स निसम्मकारिणो । सञ्‍ञतस्स च धम्मजीविनो अप्प मत्तस्स यसोऽभिवड्ढति ॥४॥ ( उत्थानवतः स्मृतिमन्तः शुचिकर्मणो निशाम्य-कारिणः । संयतस्य च धर्मजीविनोऽप्रमत्तस्य यशोभिवर्द्धते ॥४॥ ) अनुवाद—( जो ) उद्योगी, सचेत, शुचि कर्मवाला, तथा सोचकर काम करनेवाला है, और संयत, धर्मानुसार जीविकावाला एवं अप्रमादी है, ( उसका ) यश बढ़ता है । राजगृह ( वेणुवन ) चुल्लपन्थक ( थेर ) २५—उट्ठानेन'प्पमादेन संञमेन दमेन च । दीपं कयिराथ मेधावी यं ओघो नाभिकीरति ॥५॥ ( उत्थानेनाऽप्रमादेन संयमेन दमेन च । द्वीपं कुर्यात् मेधावी यं ओघो नाभिकिरति ॥५॥ )