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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन

DevanagariHindipublished213 pages

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२८ ] अप्पमादवग्गो [ १३ अनुवाद—मेधावी (पुरुष) उद्योग, अप्रमाद, संयम, और दम द्वारा (अपने लिये ऐसा) द्वीप बनावें, जिसे बाढ़ नहीं डुबा सके। जेतवन बालनक्खतधुट्ठ (होळी) २६—पमादमनुयुञ्जन्ति बाला दुम्मेधिनो जना । अप्पमादञ्च मेधावी धनं सेट्ठं 'व रक्खति ॥६॥ (प्रमादमनुयुञ्जन्ति बाला दुर्मेधसो जनाः । अप्रमादं च मेधावी धनं श्रेष्ठमिव रक्षति ॥६॥) अनुवाद—मूर्ख दुर्मेध जन प्रमादमें लगते हैं; मेधावी श्रेष्ठ धनकी भाँति अप्रमादकी रक्षा करता है। २७-मा पमादमनुयुञ्जेथ मा कामरतिसन्थवं । अप्पमत्तो हि झायन्तो पप्पोति विपुलं सुखं ॥७॥ (मा प्रमादमनुयुंजीत मा कामरतिसंस्तवम् । अप्रमत्तो हि ध्यायन् प्राप्नोति विपुलं सुखम् ॥७॥) अनुवाद—मत प्रमादमें फँसो, मत कामोंमें रत होओ, मत काम रतिमें लिप्त हो । प्रमादरहित (पुरुष) ध्यान करते महान् सुखको प्राप्त होता है। जेतवन महाकस्सप (थेर) २८—पमादं अप्पमादेन यदा नुदति पण्डितो । पञ्ञापासादमारुह्य असोको सोकिनिं पजं । पब्बतट्ठो 'व भूम्मट्ठे धीरो बाले अवेक्खति ॥८॥