धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन
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Read in context७४ ] अरहन्तवग्गो [ ४३ अनुवाद—सचेत हो वह उद्योग करते हैं, (गृह-)सुख में रमण नहीं करते, हंस जैसे क्षुद्र जलाशयको छोड़कर चले जाते हैं, (वैसे ही यह अर्हद् ) गृहको छोड़ जाते हैं। जेतवन बेलट्ठि सीस ६२–येसं सन्निचयो नत्थि ये परिञ्ञातभोजना । सुञ्ञतो अनिमित्तो च विमोक्खो यस्स गोचरो । आकासे 'व सकुन्तानं गति तेसं दुरन्नया ॥३॥ ( येषां सञ्चियो नास्ति ये परिज्ञातभोजनाः । शून्यताऽनिमित्तश्च विमोक्षो यस्य गोचरः । आकाश इव शकुन्तानां गतिः तेषां दुरन्वया ॥३॥) अनुवाद—जो (वस्तुओका) सचय नहीं करते, जिनका भोजन नियत है, शून्यता-स्वरूप तथा कारण-रहित मोक्ष (=निर्वाण) जिनको दिखाई पडता है; उनकी गति (=गन्तव्य स्थान) आकाशमें पक्षियोकी (गतिकी) भांति अज्ञेय है । राजगृह (वेणुवन) अनुरुद्ध (थेर) ६३-यस्सा'सवा परिक्खीणा आहारे च अनिस्सितो । सुञ्ञतो अनिमित्तो च विमोक्खो यस्स गोचरो । आकासे 'व सकुन्तानं पदं तस्स दुरन्नयं ॥४॥ ( यस्यास्रवाः परिक्षीणा आहारे च अनिःसृतः । शून्यताऽनिमित्तश्च विमोक्षो यस्य गोचरः । आकाश इव शकुन्तानां पदं तस्य दुरन्वयम् ॥४॥)