धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन
DevanagariHindipublished213 pages
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७—अरहन्तवग्गो राजगह ( जीवकका आम्रवन ) जीवक ९०-गतद्धिनो विसोकस्स विप्पमुत्तस्स सब्बधि । सब्बगन्थप्पहीणस्स परिळाहो न विज्जति ॥१॥ ( गताध्वनो विशोकस्य विप्रमुक्तस्य सर्वथा । सर्वग्रन्थप्रहीणस्य परिदाहो न विद्यते ॥१॥) अनुवाद—जिसका मार्ग(-गमन ) समाप्त हो चुका है, जो शोक- रहित तथा सर्वथा मुक्त है; जिसकी सभी ग्रंथियाँ क्षीण हो गई हैं ; उसके लिये सन्ताप नहीं है । राजगह ( वेणुवन ) महाकस्सप ६१-उय्युञ्जन्ति सतीमन्तो न निकेते रमन्ति ते । हंसा 'व पल्ललं हित्वा ओकमोकं जहन्ति ते ॥२॥ ( उद्युञ्जते स्मृतिमन्तो न निकेते रमन्ते ते । हंसा इव पल्वलं हित्वा ओकमोकं जहति ते ॥२॥) ७२ ]