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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

by महापण्डित राहुल सांकृत्यायन

DevanagariHindipublished213 pages

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१२४ ] अत्तवग्गो [ ७३ अनुवाद—पहिले अपनेको ही उचित (काम) में लगावे, (फिर) यदि दूसरेको उपदेश करे, (तो) पंडित क्लेशको न प्राप्त होगा। जेतवन (अभ्यासी) तिस्स (थेर) १५९-अत्तानञ्चे तथा कयिरा यथञ्जमनुसासति । सुदन्तो वत दम्मेथ अत्ता हि किर दुद्दमो ॥३॥ (आत्मानं चेत् तथा कुर्याद् यथाऽन्यमनुशास्ति । सुदान्तो बत दमयेद्, आत्मा हि किल दुर्दमः ॥३॥ ) अनुवाद—अपनेको वैसा बनावे, जैसा दूसरेको अनुशासन करना है; (पहिले) अपनेको भली प्रकार दमन करे; वस्तुतः अपनेको दमन करना (ही) कठिन है। जेतवन कुमार कस्सपकी माता (थेरी) १६०-अत्ता हि अत्तनो नाथो को हि नाथो परो सिया । अत्तना'व सुदन्तेन नाथं लभति दुल्लभं ॥४॥ (आत्मा¹ हि आत्मनो नाथः को हि नाथः परः स्यात् । आत्मनैव सुदान्तेन नाथं लभते दुर्लभम् ॥४॥ ) १ भगवद्गीता (अध्याय ६)में— “उद्धरेदात्मनात्मान नात्मानमवसादयेत् । आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥४॥ बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः । अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्तेतात्मैव शत्रुवत् ॥५॥”

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