दोहावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ५७३ दोहे सान्वय सटीक)
Dohavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
by गोस्वामी तुलसीदास
Page 17 of 196
Read in contextश्रीसीतारामाभ्यां नमः दोहावली ध्यान राम बाम दिसि जानकी लखन दाहिनी ओर। ध्यान सकल कल्यानमय सुरतरु तुलसी तोर ॥१॥ भावार्थ—भगवान् श्रीरामजीकी बायीं ओर श्रीजानकीजी हैं और दाहिनी ओर श्रीलक्ष्मणजी हैं—यह ध्यान सम्पूर्णरूपसे कल्याण- मय है। हे तुलसी ! तेरे लिये तो यह मनमाना फल देनेवाला कल्प- वृक्ष ही है ॥ १ ॥ सीता लखन समेत प्रभु सोहत तुलसीदास। हरषत सुर बरषत सुमन सगुन सुमंगल बास ॥२॥ भावार्थ—तुलसीदासजी कहते हैं कि श्रीसीताजी और श्रीलक्ष्मण- जीके सहित प्रभु श्रीरामचन्द्रजी सुशोभित हो रहे हैं, देवतागण हर्षित होकर फूल बरसा रहे हैं। भगवान्का यह सगुण ध्यान सुमङ्गल— परम कल्याणका निवासस्थान है ॥ २ ॥ पंचबटी बट बिटप तर सीता लखन समेत। सोहत तुलसीदास प्रभु सकल सुमंगल देत ॥३॥ भावार्थ—पंचवटीमें वटवृक्षके नीचे श्रीसीताजी और श्रीलक्ष्मणजी- समेत प्रभु श्रीरामजी सुशोभित हैं। तुलसीदासजी कहते हैं कि यह ध्यान सब सुमङ्गलोंको देता है ॥ ३ ॥