हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)
Hit Chaurasi of Goswami Hit Harivansh with Commentary
by गोस्वामी हित हरिवंश
DevanagariHindipublished275 pages
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॥ श्रीहित ॥ ॥ श्रीराधा वल्लभो जयति ॥ मङ्गलाचरण नवल चंद प्रिया बदन, अति अनूप रूप सदन, हँसनि नवल मंद चपल चितवन सुखदाई। नवल अधर सरस लाल दसन झलक छबि रसाल, छिन छिन छबि होत नवल मन नहिं ठहराई॥ निरखत सोभा गँभीर बिसरे पिय नैन चीर, मनहुँ कमल रहे फूलि तरनि उदय माई। नवल प्रिया नव किसोर नवल सखी चहूँ ओर, विमल प्रेम ऊपर 'हित ध्रुव' बलि जाई॥
- हितदास