हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)
by नारायण पण्डित
Source: हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित) · चौखम्बा विद्याभवन · 2017 (origin)
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Read in context१२ पृष्ठ श्लोक वज्र और राजाके तेजकी निन्दा १४९ १६८ शूरोंके दुर्जन गुण १४९ १६९ युद्धका समय १४९ १७० संग्राममें मरनेकी प्रशंसा १४९,१५०, { सु. १७१,१७२ २१३ { वि. १४७ से १४८ तक. तेजहीन बलवान्की निन्दा १५० १७३ युद्ध, याचना, धनादिकी निन्दा १५० १७४ धूर्त मनुष्यकी निन्दा १५१ १७५ मृत्युकी प्रशंसा १५२ १७७ राजाओंका कर्तव्य कार्य १५२,१५३ १७८ से १८१ तक. दयालु राजा, लोभी } ब्राह्मणदिकी निन्दा } १५३ १८२ राजाओंकी नीतिकी प्रशंसा १५३ १८३ राजाकी प्रशंसा १५५,१५६ २,३ मूर्खकी निन्दा तथा लक्षण १५७,१७२ ४,३१ पराक्रमकी प्रशंसा १५९ ७ सज्जन-सेवाकी प्रशंसा १६१ १०,११,१२ हाथी, सर्प, राजा, दुर्जनसे भय १६२ १४ मंत्रीके लक्षण १६४,१६५,२०७ १६,१७,१३३,१३४ दूतके लक्षण १६३,१६६ १५,१९,२० दुर्जनके संगकी निन्दा १६६,१६७,१६८ २१,२२,२३ पतिव्रताके लिये } भर्ताकी प्रशंसा } १७०,१७१ २५ से ३० तक. पण्डित और मूर्खका लक्षण १७२ ३१ भेदियेकी प्रशंसा १७३,१७४ ३४,३५ मंत्रका गुप्त रखना } तथा प्रशंसा } १७४,१७६ ३६,३७,४२ युद्धकी असंमति १७५ ३९