हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)
by नारायण पण्डित
Source: हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित) · चौखम्बा विद्याभवन · 2017 (origin)
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Read in context११ पृष्ठ श्लोक कोशका दूषण ११८ ९४ अधिक व्ययकी निन्दा ११८ ९५ ब्राह्मण और क्षत्रियको अ- ११९ ९६,९७ धिकारी करनेसे हानि पुराने सेवककी निन्दा ११९ ९८,९९ मंत्रीकी निन्दा { ११९,१२०,१३५, { सु. १०० से १०६ तक. १२८ १७५,१९७,१९८ १२९ वि० ३८,१०३,१०४ दंडनीय पुत्रादिको दंड देना १२१ १०७ अहंकार आदि कारणसे नष्टता १२१ १०८ राजाकी कर्तव्यता १२१ १०९ मनुष्यके कर्मको सूर्यादिका जानना १२६ ११२ चतुरकी प्रशंसा १२७ ११३ उपायकी प्रशंसा १३० १२० बिना मृत्युके मृत्यु १३१ १२१ प्रियवस्तुकी प्रशंसा १३६ १३२,१३३ राजाकी दृष्टिकी प्रशंसा १३७ १३४ सदुपदेशकी प्रशंसा १३७ १३५ राज्यभेदका मूल कारण १३७ १३६ मित्र, स्त्री आदिकी प्रशंसा १३९ १४१ राजाकी निन्दा १३९,१४५,१४६ १४२,१५८,१५९,१६० बिना विचारकी दंडकी निन्दा १३९ १४३,१४४ मंत्रका गुप्त रखना १४०,१४४ १४६,१४७,१५५ मृत्युके चार द्वार १४२ १५१ राजाके सेवककी निन्दा १४३ १५२ धन, विषय, स्त्री आदि पानेसे फल १४३ १५३ स्त्री, कृपण, राजा आदिकी निन्दा १४५ १५६ उपकार उपदेशादिकी नष्टता १४६,१४७ १६१,१६२,१६३ समान-बलमें युद्धकी योग्यता १४८ १६६