हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)
by नारायण पण्डित
Source: हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित) · चौखम्बा विद्याभवन · 2017 (origin)
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पृष्ठ श्लोक
परोपकारके खातर जीनेका फल ९६,९७,९८ ३६ से ४४ तक.
मूर्खकी निन्दा ९९,१०१ ४५,५२.
कर्मकी प्रशंसा ९९,१०० ४६ से ५०
पण्डितका लक्षण १०१,१०३ ५१,६२
सेवाकी रीति १०१ ५४,५५
राजाके गृहयोग्य मनुष्य १०२ ५६
कायर पुरुषका लक्षण १०२ ५७
राजा, स्त्री और बेलका
निकट आश्रय करना १०२ ५८
स्नेहयुक्तके चिह्न १०३ ५९,६०
विरक्तके चिह्न १०३ ६१
कुअवसरके वचनकी निन्दा १०४ ६३
राजाके बिना आज्ञा
कार्यकी कर्तव्यता } १०४ ६४
गुणकी प्रशंसा तथा रक्षा १०४ ६५
राजाको तृण आदिकी आवश्यकता १०५ ६६
मणि और कांचका भेद १०६ ६८
मनुष्यकी उत्साहहीनता १०६ ६९
भृत्य तथा आभरणके
योग्य स्थान आदि } १०६,१०७ ७१,७२,७३
अवज्ञाकी निन्दा १०८ ७७,७८
आपत्तिरूपी कसौटी पर
संबंधियोंकी परीक्षा } १०९ ८०
छोटे शत्रुके लिये समानघातक ११२ ८४
विना शस्त्र मृत्यु ११३ ८५
मतिप्रशंसा ११३,३१ ८६,१२२
बड़ोंका समान पर बल ११४ ८७,८८
सेवकप्रशंसा ११७ ९०,९१,९२