हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)
by नारायण पण्डित
Source: हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित) · चौखम्बा विद्याभवन · 2017 (origin)
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Read in context९ पृष्ठ श्लोक धनवान् हो कर निर्धनताकी घमंड ६८ १८० किंचित् काल भोगने योग्य वस्तु ६८ १८१ ईश्वरके आधीन जीविका ६८ १८२,१८३ धनकी निन्दा ६८,६९ १८४ से.१८९ तक. तृष्णाके त्यागकी प्रशंसा ७० १९० सज्जनकी प्रशंसा ७० १९३ दानी मनुष्यकी प्रशंसा ७० १९४ चार प्रकारके मित्र ७२ १९५ मैत्रीकी प्रशंसा ७३ १९६ स्त्रियोंके भृकुटीरूपी } बाणोंसे धैर्यका नाश } ७३ १९८ स्त्रियोंके दोष ७४ १९९ पतिव्रताका लक्षण ७४ २००,२०१ राजाकी प्रशंसा { ७६,७७,११० { मि. २०३ से २०६ तक. सु. ८१, { २१५,२१२,२४० { ८२ वि. १४४, १४५ सं. ५८ दुःखमें दुःखका होना ७९ २०८ उत्पत्तिका अवश्य नाश ८० २१२ मित्रकी प्रशंसा ८०,८१ २१३,२१४ निश्चित कार्य पर दृढ़ता ८२ २१५ उन्नतिके विघ्न ८५ ४,५ पुत्रनिन्दा ८६ ७ धन, बल, शास्त्र आदिकी सफलता ८६ ९ उद्यमकी प्रशंसा ८७,८८ १३,१४,१५ आयुकी बलवानता ८८,८९ १६,१७,१८ सेवाकी निन्दा ९०,९१,९२ २० से २७ तक. सेवाकी प्रशंसा ९२,९५,९६ २८,२९,३४,३५ स्वामीसेवककी निन्दा ९५ ३२