हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)
by नारायण पण्डित
Source: हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित) · चौखम्बा विद्याभवन · 2017 (origin)
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Read in context१५४ हितोपदेशः [ सुहृद्भेदः १८४- विष्णुशर्मोवाच—'सुहृद्द्वेदः श्रुतस्तावद्भवद्भिः ।' राजपुत्रा ऊचुः—'भवत्प्रसादाच्छ्रुतः। सुखिनो भूता वयम् ।' विष्णुशर्मा बोले—'आपने सुहृद्भेद सुन लिया ?' राजकुमार बोले—'आपकी कृपासे सुना और हम बहुत सुखी हुए ।' विष्णुशर्माऽब्रवीत्—'अपरमपीदमस्तु— सुहृद्भेदस्तावद्भवतु भवतां शत्रुनिलये खलः कालाकृष्टः प्रलयमुपसर्पत्वहरहः । जनो नित्यं भूयात् सकलसुखसंपत्तिवसतिः कथारामे रम्ये सततमिह बालोऽपि रमताम्' ॥ १८४ ॥ इति हितोपदेशे सुहृद्भेदो नाम द्वितीयः कथासंग्रहः समाप्तः । विष्णुशर्मा बोले—'यह और भी हो—आपके शत्रुओंके घरमें मित्रोंमें फूट हो, दुष्ट जन कालके वशमें पड़ कर प्रतिदिन नष्ट हो, प्रजा आपके राज्यमें सदा सब सुख और संपत्तिकी खान हो, और इस रमणीय, हितोपदेशके नीतिकथा रूपी उपवनमें बालक हमेशा रमण करें' ॥ १८४ ॥ पं० रामेश्वरभट्टका किया हुआ हितोपदेश ग्रंथके सुहृद्भेद नामक दूसरे भागका भाषा अनुवाद समाप्त हुआ. शुभम्.