हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)
by नारायण पण्डित
Source: हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित) · चौखम्बा विद्याभवन · 2017 (origin)
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Read in context१४ पृष्ठ श्लोक राजाका दूषण २०१ वि. ११५ आवश्यक उपदेश २०२,२०३ वि. ११६ से ११९ तक. देवता गुरु आदि पर कोप न करना २०३ वि. १२० स्वास्थ्यमें पांडित्य २०४ वि. १२१ बुद्धिमान् और बुद्धिहीनमें भेद २०४ १२२ व्ययकी प्रशंसा २०५ १२३,१२४,१२५ शूरकी प्रशंसा २०६ १२६,१२७ राजाके महागुण २०६,२०७ १२९ से १३२ तक. दुर्गाश्रयप्रशंसा २०८ १३५ युद्धमें राजाकी अग्रगण्यता २०८ १३६ दुर्गके दोष २०९ १३७ दुर्गके जयके उपाय २०९ १३८ युद्धमें यथावसर कर्तव्य २१० १३९ स्वामी मंत्रीकी आपसमें प्रशंसा २१० १४० समरमें उत्साह २११ १४१,१४२ राज्यके छः अंग २११ १४३ भाग्यकी निन्दा २१५ २ कर्मका दोष २१५ ३ मित्रोपदेशप्रशंसा २१५ ४ उपाय तथा अपायका विचार २१९ ८ शत्रुके विश्वासकी निन्दा २२१ ९ सेवकके उपकारकी न मन्तव्यता २२१ १० विचारहीनको उपदेश २२२ ११ नीचको उच्चपद देनेकी निन्दा २२२ १२ अधिक लोभकी निन्दा २२३ १३ मित्र और शत्रु का लक्षण २२४ १४ अप्राप्त चिंताकी निन्दा २२५ १५