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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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के स्थान पर अंग प्रत्यंग रहित केवल मास पिण्ड का जन्म हुआ। यह मूक अथवा प्रेत गर्भ ही था।

२- मुरादाबाद नगरी विलक्षण प्रतिभाओं को जन्म देने में सदैव अग्रणी रही है। संसार प्रसिद्ध दिव्य विभूतियों ने इस भूमि पर जन्म लेकर संसार को नई से नई दिशा दी है। कानूनोंधोयार्थ के निवासी, वयोवृद्ध ज्योतिष के प्रकाण्ड पण्डित श्रद्धेय जसवन्तराय जी के अनेकानेक शिष्य हैं जो ज्योतिष की ज्योति को प्रज्वलित रख कर जन सेवा में लगे हुए हैं। ऐसे महान व्यक्तित्व के निवास पर उनके सुयोग्य शिष्य विजय कुमार गुप्तः जी के साथ जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। श्री जसवन्त राय जी ने खड़े होकर मेरा स्वागत किया, यह उनकी साधुता और महान उदारता का परिचायक है।

चर्चा के बीच एक प्रसंग छिड़ा कि एक व्यक्ति अपनी पत्नी लेकर मेरे पास कई बार आये; कहा दो बार ऐसा हो चुका है कि मेरी पत्नी को गर्भ होता है और तीन मास होने के पश्चात् अनायास गायब हो जाता है, पता नहीं ऐसा क्यों हो जाता है। क्या कोई ऊपरी हवा तो नहीं जो ले जाती हो? राय साहब जी ने कहा- मेरी समझ में तो कुछ नहीं आया और मुझसे कहा- आप इसमें हमारा मार्ग दर्शन कीजिये कि वास्तविकता क्या है?

मैंने कहा- इसमें ऊपरी हवा अथवा प्रेत आदि कुछ नहीं है, जो ध्रुण को उठा कर ले जाय। 'केशाद' नाम के कीटाणु होते हैं, वह ध्रुण को खा जाता है और ध्रुण समाप्त होकर गर्भाशय खाली हो जाता है। राय साहब जी ने आश्चर्य चकित होकर कहा- आज आपसे चर्चा करके एक नई बात सामने आई, जिसकी जानकारी हमें नहीं थी। इसका कुछ उपचार भी है? मैंने कहा इसका उपचार बहुत सरल है। वह बोले क्या? मैंने कहा- इसका उपचार मैंने 'गर्भ स्थित न होने के कारण और उसका उपचार' प्रकरण में '३-' के क्रम पर आगे लिखा है, वहाँ पर देखें।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri