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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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नगर में तसहुक हुसैन (बाबला) हकीम जी बड़े प्रसिद्ध थे। रामपुर स्टेट में एक पठान दम्पति के घर में उक्त प्रकार की घटना कई बार हो चुकी थी, वह दोनों बहुत चिन्तित थे, उनके एक मित्र जो मुरादाबाद में ही रहते थे, सलाह दी कि तुम हकीम जी को दिखाओ। पठान ने कहा- इसमें हकीम जी क्या करेंगे यह तो किसी 'आसेव' का काम है जो मेरे पीछे पड़ा है। मित्र ने कहा- दिखाने में कोई हर्ज नहीं है। पठान अपनी पत्नी को लेकर आया। हकीम जी ने हाथ देखा, और कहा- इसकी शर्माणाह में मूली चढ़ा दे। यह सुनकर पठान क्रोध से लाल हो उठा, मित्र ने पहचाना और उसी क्षण बाहर ले आया। पठान ने बाहर आकर कहा- इसने यह भयी मजाक क्यों की, रामपुर होता तो मैं इसे उसी समय चौर देता। मित्र ने शान्त किया और घर पर ले आया। समझाया क्रोध को दूर किया। दो-चार दिन के पश्चात् मित्र ने पठान से कहा- देखो वह हकीम है इलाज करता है, कोई पागल नहीं, कुछ करके देखो तो सही पठान की समझ में आया और मूली का प्रयोग किया, और देखा तो उस पर छोटे-छोटे काले कीट लगे थे विश्वास बना दो-चार दिन ऐसा ही किया कीट समाप्त हो गये और गर्भ रुक गया।

वैद्यराज श्री बुद्धासिंह जी ने इस दोष को मुझे बताया और इसकी चिकित्सा से अवगत कराया था।

३- तिलक धर्माथ औषधालय में वैद्य पण्डित बन्नीप्रसाद जी चिकित्सा करते थे। पण्डित गोपीनाथ जी चिकित्सा हेतु औषधालय पहुँचे। देखा वैद्य जी खिन्न मुद्रा में बैठे हैं पण्डित जी ने खिन्नता का कारण जानना चाहा वैद्य जी ने कहा- बच्चे का जन्म हुआ और वह चल बसा, चौथी बार ऐसा हुआ है। पण्डित जी ने कहा- आप चिकित्सक हैं इसकी चिकित्सा कीजिए? वैद्य जी ने- भाग्य की कोई चिकित्सा होती है क्या? पण्डित जी- आप

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्त:

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