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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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मासिक धर्म से चौथे दिन एक प्लास (ढाक) का हरा पत्ता जीवित बछड़े वाली गाय के दूध के साथ घोटकर स्त्री को देने से, उस मास में गर्भ रहने पर पुत्र उत्पन्न होगा।

गर्भिणी स्त्री को दूसरे मास के प्रारम्भ से ही प्रतिदिन प्लास (ढाक) के छाया में सुखाये हुए पत्तों का चूर्ण समान भाग मिश्री मिलाकर ३ माशा जीवित बछड़े वाली गाय के दूध के साथ निरन्तर सेवन कराने से पुत्र लाभ हो सकता है।

जिनके कन्या ही कन्या होती हैं और वह उपरोक्त उपायों को या तो समझ न सके हैं या क्रियात्मक रूप में न ला सके हैं, तो वह इस बात का ध्यान रखें कि गर्भस्थित हो जाने के ८१ से ८५ दिन के अन्दर यदि स्त्री को 'सूर्य गुणी' औषधि का प्रयोग कराया जाय तो पुत्र उत्पन्न हो सकता है, क्योंकि स्त्रियों में चन्द्र गुण की अधिकता होती है और पुरुषों में सूर्य गुण की। 'सूर्य गुणी' औषधि वेद-कृति १३, राम विहार कालोनी, जिला सहकारी बैंक के पीछे, मुरादाबाद से प्राप्त हो सकती है।

श्रांति निवारण

अधिकतर व्यक्ति युगम अयुगम रात्रियों के निकालने में भ्रम में पड़ जाते हैं कोई तो श्रुतु स्नान के पश्चात् से तिथि की गिनती करने लगते हैं। इसका सही रूप इस प्रकार है कि मासिक धर्म जिस समय आरम्भ होता है उसी समय के पश्चात् जो पहली रात्रि आयेगी वही पहली रात्रि है और २४ घण्टे बाद दूसरा दिन या दूसरी रात्रि मानी जायगी जैसे मासिक धर्म रात्रि को आठ बजे आरम्भ हुआ तो वही रात्रि पहली है और उसी से २४ घण्टे पश्चात् अगले दिन रात्रि को पाँनेआठ बजे तो पहली रात्रि है और सवाआठ बजे दूसरी रात्रि मानी जायगी। जिस दिन से मासिक धर्म आरम्भ होता है वही पहला दिन कहलाता है। उसी दिन से १६ रात्रि तक गर्भाधान होता है उसके पश्चात् नहीं।

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वारन्द्ध गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

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