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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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एक और भ्रान्ति है, कोई इन तिथियों को पत्रे से जोड़ते हैं, कोई कलेंडर से यह दोनों ही गलत हैं। वास्तव में जिस दिन स्त्री को मासिक धर्म होता है, वही दिन उसका पहला दिन होता है अर्थात् पहली तारीख होती है।


चेतावनी

१- ४,७,११,१३ रात्रियों दोष युक्त कलंक को प्रदान करने वाली सन्तान को जन्म देती हैं। इन रात्रियों में कभी भूल कर भी गर्भ स्थापित न करें।

२- परदेश में अथवा दूसरे के गृह पर कभी भी गर्भाधान न करें।

३- ५,६,८,९,१०,१२,१४ रात्रियाँ दोष रहित हैं, इनमें गर्भ स्थापित करना उचित है।

४- मेरा जन्म सम्बत् १९८४ अर्थात् १९२७ ई० का है। १९५६ में इच्छानुसार सन्तान पुस्तक लिखने लगा। उसी बीच व्यास ग्रन्थ देखने को मिला, उसका आदि अन्त कुछ नहीं था। बीच के हो पुच्छ थें उसी में सोलह कला की चर्चा को देखा, जो पुस्तक में आंकित है। तब से अब तक मैं बराबर इसी विचार में लगा रहा कि सन्तानों में इस प्रकार का दोष युक्त अन्तर क्यों कर होता है। आज सम्बत् २०६४ प्रथम ज्येष्ठ की अमावस्या के दिन यज्ञ समय पर गायत्री जाप के पश्चात् अनायास नेत्रों के सामने तेज प्रकाश की चमक, चमकी और उसी क्षण परमात्म कृपा से ५१ वर्ष पूर्व इस उलझे हुये प्रश्न का समाधान मिला। वह समाधान था 'यह सब आतंक के कारण ही होता है' अर्थात् स्त्री के मासिक धर्म का 'रेजः'।

अब आपके सामने हर दिन की रात्रि के स्त्री के आतंक की

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri