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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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सन्तान में दिव्यता प्रवेश करती है।

पुत्र की तिथियों में कोई विकार युक्त तिथि नहीं है। वह युवा होकर तामस पूर्ण, उत्तेजक भोजन, साहित्य, संगत आदि के अधिक सेवन से ही अधिक विषयी बन जाता है। उसे केवल भोजन साहित्य और संगत के त्याग से ही नियन्त्रित किया जाता है।

५- यदि अधिक कामुक अथवा विषयी हो तो वर्जित तिथियों में कण्डोम का प्रयोग कर सकते हो। अधिक विषयी होना अच्छा नहीं, इसका दुष्परिणाम ५०वर्ष की आयु के पश्चात् अवश्य ही भुगतना पड़ेगा। शरीर अधिक जरजरित हो जाता है।

६- किसी भी प्रकार के नशे की अवस्था में गर्भ स्थिति हो जाने पर, उससे उत्पन्न सन्तान, किसी भी प्रकार की मानसिक विकृति का किसी भी अवस्था अथवा आयु में शिकार बन सकती है, इसे कोई रोक नहीं सकता। पौरुष शक्ति-वर्धक औषधियों में नशा ही प्रधान होता है।

७- गर्भावस्था में मैथुन और कामुक अथवा उत्तेजक साहित्य का अवलोकन करने से गर्भित सन्तान अधिक कामुक और विषयी हो जाती है। अथवा अच्छा साहित्य पढ़ने से अच्छी सन्तान होती है।

८- महिलाओं के मासिक धर्म के समय पर प्रयोग में आने वाला 'पैड' उत्तम है, स्वच्छ है। यह अवस्था एक अत्यन्त सम्बेदनशील, कोमल, प्रक्रिया की है। इसमें संचित आर्तव का प्रवाह होता है। ऐसी अवस्था में खेलना, कूदना, दौड़ना, साइकिल चलाना आदि कार्य अत्यन्त हानिप्रद हैं। ऐसा करने से आर्तव का साव तीव्र हो जाता है, जो भविष्य में गर्भपात और बन्ध्या दोष का कारण बन सकता है। इस अवस्था में जीन्स या कसी पैंट अथवा कच्चा पहरना भी हानिकारक है। ढीली सलवार, धोती, पेट्टीकोट पहरना ही हितकर है।

९- एक ट्रक ड्राइवर के घर में बच्चे ने जन्म लिया। बच्चे इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri