इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
Page 134 of 250
Read in contextको जानते थे। उन्होंने जिसे भगवान मान लिया। बस वहीं उसे तथा उसके गुणों को ताला लगा दिया। जिस प्रकार हम यह कभी नहीं विचार सकते कि हमारे पुत्र भी १२, १६ कला के राम और कृष्ण हो सकते हैं। उसी प्रकार महात्मा गांधी को भी भगवान बनाने पर यह नहीं विचार कर सकते कि महात्मा गांधी जैसे और भी महान पुरुष हो सकते हैं। महात्मा गांधी चाहते थे, कि उन जैसे अनेक महान पुरुष भारत में जन्म लें।
प्रिय पाठको! यह कलायें आप अपने बच्चों में ला सकते हैं, इन कलाओं का बच्चों को प्रदान करना आपके हाथों में है। आप जिस कला के बच्चे चाहें बना सकते हैं, चौथी रात्रि से १६ रात्रि तक जो गर्भाधान का समय है यही चौथी कला से १६ कला तक का विज्ञान है। आप जिस रात्रि में गर्भाधान करेंगे उतनी ही कलायें बच्चे में आ जायेंगी। यदि आप चाहते हैं कि हमारा बच्चा १६ कला का पूर्ण और श्रीकृष्ण जैसा हो तो आप १६वीं रात्रि में ही गर्भाधान करें, तो आप निश्चय ही १६ कला का पुत्र प्राप्त करेंगे।
वसुदेव देवकी इस कला के विज्ञान को भली प्रकार जानते थे। जब कंस की कारागार में पड़े-पड़े अत्यन्त दुःखी हो गए और उनके कई बालकों को पंचतत्त्व में कंस ने लय कर दिए थे। तब उनके मन में कंस से प्रतिशोध लेने की ज्वाला अधिक तीव्रता से धधक उठी। तभी उन्होंने १६वीं रात्रि को समागम द्वारा श्री कृष्ण को जन्म दिया, जिसने अत्याचारी कंस को सदैव के लिए सुख की नींद सुला दिया।
इच्छानुसार सन्तान
१२८
वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri