BharatKosha
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

Page 138 of 250

Read in context
Page 138

सत्यवती को पुत्र व्यास ने उसको डरी हुई दुःखित और पीली देखकर कहा कि तुम मुझ को कुरूप देखकर पीली हो गयीं इसलिए तुम्हारा पुत्र भी पीला होगा वह पीला अर्थात् पांडु नाम से प्रसिद्ध होगा। ऋषि यह बात कहकर घर से निकलने पर सत्यवती ने उनसे सन्तान की बात पूछी और व्यास जी ने माता से कहा कि पुत्र पीला होगा। सत्यवती ने यह सुन कर फिर उनसे एक पुत्र की और प्रार्थना की, महर्षि ने वह भी स्वीकार करली। समय आने पर देवी अम्बालिक ने सुन्दर पांडु वर्ण एक कुमार उत्पन्न किया। फिर बड़ी वधु का ऋतुकाल आने पर सत्यवती ने उसको राजर्षि के लिए नियुक्त किया। परन्तु उसने ऋषि शरीर की दुर्गन्ध स्मरण कर उसका कहना नहीं माना और देव कन्या रूपी उस काशीराज पुत्री ने अप्सरा समान एक दासी को अपने आभूषणों से अलंकृत कर व्यास जी के पास भेज दिया। ऋषि के आने पर दासी ने उठकर उनको नमस्ते की और ऋषि की आज्ञानुसार काम किया। व्रतशील महर्षि उसके पास रहकर अति प्रसन्न हुए और ज्ञाते हुए कहा कि तुम्हारा दासीपन जाता रहेगा। तुम्हारे गर्भ में स्थित सन्तान धर्मात्मा और बुद्धिमानों में श्रेष्ठ होगी, व्यास जी के वीर्य से और उसके गर्भ से धृतराष्ट्र और पांडु के भाई विदुर ने जन्म लिया।

समागम समय आँखें मीचने पर धृतराष्ट्र अन्धे का जन्म हुआ। भय के कारण शरीर पीला पड़ जाने से पांडु (पीलिया रोगी) पुत्र जन्मा और निर्भय, प्रीतियुक्त, प्रसन्न चित्त और शान्ति पूर्वक विचारों से धर्मात्मा, नीतिज्ञ दूरदर्शी विद्वान विदुर ने जन्म लिया।

इसलिए समागम समय उत्तम सन्तान की इच्छा के लिए दम्पति को प्रसन्न चित्त, आनन्दमय, प्रीतियुक्त वातावरण में ही समागम करना उपयुक्त है, विपरीत दशा में नहीं। ऋतु काल में धर्म से गमन करने से सन्तान सौ और इससे भी अधिक वर्ष की आयुँ मोगती है।

इच्छानुसार सन्तान

१३२

वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri