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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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प्रथम-पुत्र की कामना के लिए नियोग कराया था। सो तीनों बार पुत्रों का ही जन्म हुआ। दूसरे- गर्भाधान समय अम्बिका अम्बालिका और दासी की जैसी जैसी भावना बनी वैसी- वैसी सन्तान ने जन्म लिया। तीसरे- व्यास जी ने अम्बिका अम्बालिका और दासी के साथ केवल एक ही एक बार गर्भाधान कृत्य किया और उसी समय गर्भ स्थित हो गया।

प्रथम महत्त्वपूर्ण विषय यह सिद्ध हुआ कि पुत्र या पुत्री को अपनी इच्छानुसार जन्म दिया जा सकता है। दूसरे गर्भाधान समय पुरुष की अपेक्षा स्त्री के विचारों का बच्चे पर तत्काल प्रभाव पड़ता है और बच्चा वैसा ही बन जाता है। तीसरे निश्चित तिथि में ही केवल एक ही बार में गर्भाधान क्रिया द्वारा गर्भ स्थित हो सकता है। हाँ यह सम्भव हो सकता है कि अम्बिका अम्बालिका और दासी को पूर्व से ही किसी औषधि का प्रयोग कराया गया हो जिससे गर्भाशय वीर्य को तत्काल ग्रहण कर सके। रोग रहित स्त्री पुरुषों के लिए इसी आशय के प्रयोगों का उल्लेख करते हैं जो परीक्षित भी हैं।

स्वर्ण भस्म २ चावल, नागकेशर का चूर्ण १ माशा (यदि नागकेशर बंगाल की मिल जाय तो अति उत्तम है) दोनों को मिलाकर एक मात्रा बनी। जब स्त्री को मासिक धर्म होकर रक्त विकार गिर जावे और स्नान कर शुद्ध हो, जिस दिन गर्भाधान का विचार हो उस दिन तक जीवित बछड़े वाली गाय के दूध से प्रातःकाल स्त्री को सेवन करायें यह योग तत्काल गर्भ स्थापन होने में उत्तम साधक है।

अथवा

मकरध्वज स्वर्ण सिन्दूर १ माशा, सितोपलादि चूर्ण ३ माशा दोनों को खरल में डालकर भली प्रकार घोटें, एक रस हो जाने पर उसकी १० मात्रा बनालें। जब स्त्री को मासिक धर्म होकर रक्त विकार गिर जावे और स्नान कर शुद्ध हो उसी दिन से १० दिन इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri