इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextआदि में स्त्री और पुरुषों की आकृतियों के चिन्ह दिये हैं। उनसे ही जनित इन्द्रियों के सम्बन्ध में ज्ञान प्राप्त करें।
७- जिस वीर्य में सन्तानोत्पादक कौटुम्ब का अभाव हो तो उस वीर्य से कदापि गर्भ स्थापित नहीं हो सकेगा। इसके लिए पुरुष को उचित है कि निम्न लिखित योग ३ मास तक निरन्तर सेवन करें। साथ में स्त्री सेवन का ३ मास तक परित्याग रखें। ऐसा करने से वीर्य में सन्तानोत्पादक कौटुम्ब बलवान होकर गर्भ स्थापित हो जायेगा।
भुने हुए बिनौलों का आटा ५० ग्राम, सलाव मिश्री पंजे की १० ग्राम, सफेद मूसली १० ग्राम, बीज बन्द १० ग्राम, तालमखाना १० ग्राम, लजवन्ती १० ग्राम, उटंगन १० ग्राम, कौंच बीज छिलका उतार कर १० ग्राम, शतावर १० ग्राम, गोखुर पहाड़ी १० ग्राम, पीपल की दाढ़ी २० ग्राम, सैमल की मूसली १० ग्राम, तोदरी सफेद १० ग्राम, तोदरी लाल १० ग्राम, साँठ १० ग्राम भूसी इसबगोल १०० ग्राम, २५० ग्राम मिश्री। भूसी को छोड़कर सबको बारीक कूट लें। ४ से ६ माशा तक दो समय दूध से लें।
गर्भ स्थित न होने पर
किन्हीं सज्जनों का विचार है कि यह आवश्यक नहीं कि जिस दिन गर्भाधान संस्कार के लिए निश्चय किया है उस दिन गर्भ स्थिति हो ही जाय। तो फिर उत्तम तिथि का निश्चय करके कैसे गर्भ स्थित हो सकता है।
प्रिय बन्धुओं! ऐसा नहीं है, जो निश्चित तिथि के दिन गर्भाधान किया जाय और गर्भ स्थित न हो। मैंने पूर्व की पंक्तियों में महाभारत काल के एक नियोग का दृश्य प्रस्तुत किया है। आप उसे पढ़कर देखें। उस घटना से तीन महत्वपूर्ण विषयों पर आश्चर्यजनक प्रकाश पड़ता है।
डक्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri