इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextभोजन- गर्भावस्था में भोजन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। यदि आप चाहते हैं गर्भावस्था का समय नितान्त निरापद रहे तथा माँ और भावी शिशु दोनों ही स्वस्थ रहें तो माँ को उचित भोजन मिलना आवश्यक है। इस समय स्त्री को केवल अपने शरीर के लिए ही उपयुक्त आहार की आवश्यकता नहीं होती, परन्तु उसे गर्भस्थ बालक के शरीर निर्माण के लिए भी भोजन के सभी मूल तत्वों की प्रचुर मात्रा मिलनी आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त भोजन में प्रोटीन, खनिज तथा विटामिनों की उपयुक्त मात्रा पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
प्रोटीन- गर्भस्थ बालक के शरीर के तन्तुकोषों के निर्माण के लिए प्रोटीन अधिक आवश्यक है।
कैलशियम- बच्चे की हड्डियों के निर्माण के लिए आवश्यक है। इसकी न्यूनता से माता तथा शिशु दोनों की हड्डियाँ तथा दंत निर्बल हो जाते हैं।
लोहा- बच्चे के रक्त कण निर्माण करता है। इसके अभाव से माता तथा बालक दोनों में रक्त अल्पता का रोग हो जाता है। जिससे बच्चों को सूखा रोग भी लग जाता है।
उपरोक्त तीनों पदार्थ दूध में अधिक पाये जाते हैं। इसलिए गर्भिणी को कम से कम १ लीटर दूध नित्य लेना चाहिए। यह आवश्यक नहीं कि दूध, दूध ही रूप में पिया जाय, उसके स्थान पर दही, छाछ, दूध की खीर, दूध का दलिया आदि प्रकारों से भी प्रयोग में लिया जा सकता है। और इस प्रकार से दूध की तरफ से अरुचि भी नहीं होगी।
विटामिन- गर्भ स्थित बालक तथा माता के शरीरों के सभी अंगों को परिपुष्ट करने के लिए सभी विटामिनों की आवश्यकता है। यह विटामिन प्रचुर मात्रा में पते वाले शाक, अन्य शाक, छिलके सहित दालें और चोकर सहित आटे में मिलते हैं। इसलिए इनका प्रयोग होना आवश्यक है।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेंद्र गुप्त
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri