इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextउषाः पान- शय्या से उठते ही ईश्वर का स्मरण करने के पश्चात् अच्छी प्रकार से मुख स्वच्छ करके एक गिलास ताजा जल में १ कागजी नींबू, संतरों का रस तथा टिमाटर का रस जिसकी रुचि हो और रुचि अनुसार मीठा तथा नमक भी मिलाया जा सकता है, मिलाकर पीना चाहिए। इससे वमन बेचैनी आदि में शान्ति मिलती है और पेट साफ होकर शौच खुलकर आती है।
प्रातराश- प्रातःकाल पानी में भोगे हुए या सूखे ही मुनक्का ७ नग, अंजीर २ नग, बादाम ५ नग और ऋतु अनुसार दही या दही की लससी तथा उष्ण दूध। रुचि अनुसार।
मध्याह्न भोजन- चोकर सहित आटे की रोटी, छिलकेदार दाल पत्ते वाले शाक, दही छाछ तथा मक्खन या घी।
तीसरे पहर- ऋतु अनुसार फल।
सायंकाल- उपरोक्त भोजन कुछ कम मात्रा में।
रात्रि को सोने से एक घण्टा पूर्व दूध या ऋतु अनुसार फलों का रस।
अन्य सावधानी- केवल इतना खाओ जितना रुचि पूर्वक खाया जा सके। धीरे-धीरे भली प्रकार चबा-चबा कर भोजन करो। अधिक गर्म, खट्टा, चरपरा, कबला मत खाओ। एक ही समय बहुत-सा मत खाओ जिससे पेट तन जाये। रखा हुआ और बासी खाना मत खाओ। गर्भावस्था में जल का प्रयोग अधिक करना चाहिए। दिन में कम से कम पाँच छः बार जल पीना चाहिए। परन्तु भोजन करते समय जल कम मात्रा में भोजन के मध्य में ही पीना उचित है।
प्रथम मास में गर्भिणी औंटा हुआ गाय का दूध ठण्डा करके जो किञ्चित उष्ण हो पान करे और दिन में थोड़ा-थोड़ा कई बार पान करे, प्रातः सायं सात्विक, हल्का भोजन करे। दही में सौंठ और ब्राह्मी का समान भाग चूर्ण ३ माशा का विशेष सेवन किया करें जिससे सन्तान अति बुद्धिमान रोग रहित शुभ गुण वाली होती है।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri