इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextजाता है कि जब हमारी पत्नी हमारे कमरे में लेटी हो तो हम अपने को अंकुश में नहीं रख सकते। कितना परिवर्तन है। इसी लिए यह विश्व शिरोमणी भारतवर्ष अधोगति को पहुँच कर पराधीनता को बेड़ियों में जकड़ा गया। समय के परिवर्तन से आज हम स्वतन्त्र हो गये। अब हमें संयम के साथ अपना जीवन व्यतीत करना चाहिए और कम से कम गर्भ स्थिति हो जाने के पश्चात् जब तक बच्चा माता का दूध पीता रहे अर्थात् कम से कम ४.६ मास का बच्चा न हो जाय तब तक ब्रह्मचर्य का जीवन व्यतीत करें। जिससे सन्तान निरोगी और दीर्घजीवी हो।
गर्भावस्था की भावना
गर्भवती स्त्री के प्रति पति का उत्तरदायित्व अधिक बढ़ जाता है। उसे अपनी पत्नी को हर प्रकार से सांत्वना और धैर्य देते रहने की आवश्यकता है। इन दिनों पहले की अपेक्षा सर्वाधिक प्रेम, स्नेह और सहानुभूति की आवश्यकता है। पत्नी की किसी भी प्रकार से पहले की अपेक्षा इस समय में उपेक्षा नहीं होनी चाहिए। वरन् घर के अन्य सदस्यों को भी उसके साथ अधिक वात्सल्य पूर्ण व्यवहार करना चाहिए और उसे इस बात का महत्व अवगत करा देना चाहिए कि वह संसार का सर्वाधिक गौरवपूर्ण पद प्राप्त करेगी।
गर्भवती स्त्री जैसे वातावरण में जैसे चित्रों का अवलोकन करेगी, जैसी उसकी दिनचर्या होगी वैसे ही विचारों के बालक को जन्म देगी।
वीर अभिमन्यु को कौन नहीं जानता। जिसने कभी युद्ध में अस्त्र-शस्त्र नहीं उठाया। वह अभिमन्यु अकेला ही द्रोणाचार्य के रचित चक्रव्यूह को खण्डित करने के लिए निर्भय अग्रसर हुआ।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri