इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextकिया गया है। सम रत्नि और विषम रत्नि के गर्भाधान से पुत्र एवं पुत्री का जन्म, सर्व सम्मत होते हुए भी कभी-कभी रजोवीर्य के न्यूनोधिक्य के कारण पूर्वोक्त सिद्धान्त को अपवाद रूप में दृष्ट होता रहता है, इस पर भी कुशल लेखक ने पर्याप्त प्रकाश डाला है। पर अपवाद पर ही केवल दृष्टि न रखकर शास्त्रीय सिद्धान्त का ही पालन करना सर्वथा श्रेयकर है।
प्रस्तुत पुस्तक के अतिरिक्त हमारे प्रिय गुप्तः जी ने और भी अनेक पुस्तकें लिखकर प्रकाशित की हैं जो आर्य सिद्धान्तों से सर्वात्मना ओत-प्रोत तथा एक दूसरे की पूरक हैं। जीवन के आरम्भिक काल में इस प्रकार की पुस्तक-रचना वास्तव में लेखक की पुनीत संस्कृति की ही परिणति है, क्योंकि—
‘प्रथमे वयसि यः शान्तः स शान्त इति मेमतिः
शुद्धात् जीवन के आरम्भ में जो शान्ति की चर्चा चलावे वही वस्तुतः सच्चा शान्ति मार्गी है।
परम पिता परमात्मा से प्रार्थना है कि हमारे उदीयमान युवक लेखक को ऐसी शक्ति, धृति और सत्प्रतिभा प्राप्त हो जिससे आप अपनी इस दिशा में सर्व हित सम्पादनार्थ उत्तरोत्तर अग्र बनते रहें तथा अपने कार्य में सदा कृत कार्य होते रहें।
इत्योभशम्
विदुषां त्रिधेमः—
भगवत् सहाय शर्मा
(आचार्य)
पुरादाबाद
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri