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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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सामाजिक उन्नति के लिए सन्तति का सुसंस्कृत होना परम आवश्यक है।

गृहस्थ आश्रम, जो सब आश्रमों का भरण-पोषण आदि के द्वारा गुरु माना गया है, उसकी सफलता सन्तानोपलब्धि होने पर ही मानी जाती है अतः सभी सदगृहस्थ सन्तान प्राप्ति के लिए परम उत्सुक रहते हैं और उसकी प्राप्ति होने पर अपने आपको धन्य एवं कृतार्थ समझते हैं। यद्यपि यह भावना गृहस्थ मात्र में पायी जाती है, पर तदर्थ उत्तम आचार-विचार की क्षमता सबमें नहीं होती और बिना उत्तम आचार-विचार के सन्तति का उत्तम बनना नितान्त असम्भव है। मानव समाज में कुछ ऐसे व्यक्ति पाये जाते हैं जो अपने सत्संस्कार-प्रेरित स्वाध्याय जन्म अनुभवों से सभी को लाभान्वित बनाने की तन-मन से सदा चेष्टा करते हैं।

हमारे परम प्रिय श्री वीरेन्द्र गुप्तः जी इसी प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। आपको आर्य परिवार में जन्म के कारण स्वाध्याय प्रवृत्ति दाय रूप में समुपगत हुई है और आपने अपने स्वाध्याय-जन्म अनुभवों को पुस्तक रूप देकर सभी का हित सम्पादित किया है। अतः आप इस प्रयास के लिए सर्वथा स्तुय्य हैं। आज पाठकों के समक्ष 'इच्छानुसार-सन्तानोत्पत्ति' का द्वितीय संस्करण 'इच्छानुसार सन्तान' के रूप में प्रस्तुत है। प्रथम संस्करण को सहृदय विज्ञ-वर्ग ने सादर ग्रहण करते हुए, उसकी उपादेयता प्रमाणित कर, अपने सदाशय एवं उदाराशय का जो परिचय दिया वह भूरि-भूरि सराहना के योग्य है, क्योंकि उन्हीं के उदाराशय के कारण हमारे गुप्तःजी उस पुस्तक का द्वितीय संस्करण प्रकाशित करने के लिये त्वतः बाध्य हुए, जिसके फलस्वरूप यह संस्करण पूर्व संस्करण की अपेक्षा अनेक परिष्करण एवं संवर्धन के साथ पाठकों की सेवा में उपस्थित है।

इस संस्करण में कतिपय नवीन उपयोगी परिवर्धन दृष्टिगत गते हैं। नक्षत्रों, ऋतुओं एवं अयनों का गर्भस्थिति पर जो प्रभाव पड़ता है उसका अत्यन्त मार्मिकता के साथ शास्त्र सम्मत विवेचन इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri