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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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यदि यह मान भी लिया जाय कि आप सभी साधन नहीं अपना सकते तो भी जितने अंश में आप अपनायेंगे उतने ही अंश में अपनी सन्तान में उत्तमता की वृद्धि आपको प्राप्त होगी। जरा सोच कर देखिये कि इसका फल अगली पीढ़ी में और अधिक अच्छा प्राप्त होगा, तब आप स्वयं सोचेंगे कि महामानव या महापुरुष को जन्म देना सम्भव है।

जिस प्रकार नसीरी के डन्डे पर एक के बाद दूसरे पर चढ़ते हुए ऊपर चढ़ जाते हैं उसी प्रकार देश की सन्तति भी प्रत्येक पीढ़ी में उत्तरोत्तर उत्कृष्टता को प्राप्त होती जायगी। परन्तु जब आप ही अपनी सन्तान को उत्तम बनाने में किसी भी अंश में अग्रसर नहीं होंगे तो फिर देश की सन्तति कैसे उत्कृष्टता को प्राप्त करेगी। इसलिए, 'हे देश भक्तों! मातृ भूमि के सच्चे सपुतों! अकर्मण्यता को त्याग कर कर्मवान् बनते हुए सर्वांश में नहीं तो किसी भी अंश में सन्तति सुधार की ओर अग्रसर हो। सर्वांश की दुहाई देते हुए कुछ भी न करने वालों की अपेक्षा सफलता के पथ पर किसी भी अंश में बढ़ने वाले श्रेष्ठ होते हैं।

जिस प्रकरण में किसी औषधि के उपयोग की आवश्यकता समझी गई है उसे उस प्रकरण में अधिकत कर दिया है, साथ में औषधि निर्माण एवं प्रयोग विधि को भी अधिकत कर दिया है। किसी किसी स्थान पर निर्मित औषधि के प्रयोग की बात आई है। वह निर्मित औषधियाँ आपको 'गुरुकुल कांगड़ी फार्मसी हरिद्वार' से तथा उनकी नगर शाखाओं से प्राप्त हो सकती हैं।

प्रस्तुत पुस्तक में उत्तमोत्तम सन्तति निर्माण के सभी साधनों को पूर्ण विवेचनात्मक दृष्टि और विस्तार से समझाया गया है। यदि फिर भी कोई बात समझ में न आये या कोई शंका हो तो, उसे समझने के लिए पत्र लिखें, साथ में उत्तर के लिए टिकट भेजें। पत्र हिन्दी भाषा में तथा पूर्ण पते सहित लिखें।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri