BharatKosha
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

Page 26 of 250

Read in context
Page 26

पहिरने वाले, सादा भोजन पाने वाले पूज्य बापू महात्मा गांधी महान व्यक्ति नहीं थे? क्या विश्व में उन्हें महानता की दृष्टि से नहीं देखा जाता था? महानता पहिनावे की टीपटाप से नहीं मिलती है। महानता तो विद्या धर्म और सत्यनिष्ठ जीवन से ही मिलती है।

संसार में एक समुदाय ऐसा भी है जो कहता है कि संसार में मनुष्यों के लिए अन्न, वस्त्र की ही आवश्यकता है और ईन्द्रिय भोगों के लिए स्त्री की। इससे इतर धर्म कर्म आदि कुछ नहीं। इस समुदाय ने प्रमुखता अन्न, वस्त्रादि, भौतिक वस्तुओं को ही दी है। ज्ञात होता है कि इस प्रकार के समुदाय को जन्म देने वाला भोगवादी और ज्ञान शून्य व्यक्ति था कहावत है (प्रत्यक्षकिम् प्रमाणम्) प्रत्यक्ष को प्रमाण क्या। जब बच्चा माता के गर्भ में आता है तब उसके जन्म से ठीक ३ मास पूर्व ही परमेश्वर माता के स्तनों में दूध भेज देता है। यह नहीं कि ईश्वर केवल भारत की या मनुष्यों की ही माताओं को दूध भेजता है वरन् संसार भर की माताओं को और समस्त जीव जन्तुओं की माताओं को भी बच्चों के जन्म से पूर्व ही दूध भेज देता है।

नाहारं चिन्तयेत्मात्रो धर्मयेकं हि चिन्तयेत्।

आहारो हि मनुष्याणां जन्मना सह जायते॥

चाणक्य नीति १२/१८

अर्थ- बुद्धिमान पुरुष भोजन की चिन्ता न करे, किन्तु एक धर्म की ही चिन्ता करे। भोजन तो मनुष्य-जन्म के साथ ही उत्पन्न होता है।

प्राकृतिक प्रमाण, माता के स्तन में दूध का आना और चाणक्य जैसे विद्वान के कथन से प्रतीत होता है कि मनुष्य को अन्न वस्त्र की चिन्ता कदाचित् करनी ही नहीं चाहिए, उसे तो धर्म की ही चिन्ता करनी चाहिए। इसका अर्थ यह नहीं कि मनुष्य धन का संघव न करे। मनुष्य धन को धर्म से उल्लब्ध करे और धर्म से ही व्यय करे। देखा गया है कि जब मनुष्य पर धन

इच्छानुसार सन्तान

२२

वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri