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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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बैठे रहने का कारण पूछा, बालक ने कहा मुझे मत छोड़ो तुम जाओ अपना काम देखो, परन्तु सन्यासी के कई बार कहने पर बालक ने कहा, क्या तुम मेरा दुःख दूर कर सकते हो तो मैं कहूँ। सन्यासी ने कहा - मुझसे जितना हो सकेगा अवश्य ही करूँगा। बताओ क्या बात है? बालक ने कहा मैंने संकल्प किया है कि जब तक मुझे विद्या और ज्ञान प्राप्त न हो जायगा तब तक मैं अन्न-जल कुछ न पाऊँगा। सन्यासी बोला बेटा तुम्हारा संकल्प तो अति सुन्दर है तथापि ऐसे ही पूरा नहीं हो सकता, इसके लिए कुछ प्रयत्न करना पड़ेगा। तुम जल में खड़े होकर ३ वर्ष तक गायत्री मंत्र का जाप करो तुम्हारे मस्तिष्क के ज्ञान तन्तु खुल जायेंगे तो तुम्हें विद्या प्राप्त होगी।

एका क्षरं परं ब्रह्म प्राणायामः परमत्तपः। सावित्र्यास्तु परं नास्ति मौनात्सत्यं विशिष्यते॥

मनु २/८३

अर्थ- ओम् यह एक अक्षर परब्रह्म का वाचक है और प्राणायाम बड़ा तप है और गायत्री से श्रेष्ठ कोई मंत्र नहीं तथा मौन से सत्य भाषण श्रेष्ठ है।

योऽधीतेऽह-न्येतांस्त्रीणि वषाण्यतन्द्रितः।

स ब्रह्म परमभ्येति वायुभूतः खमूर्तिमान्॥

मनु २/८२

अर्थ- जो पुरुष प्रतिदिन आलस्य रहित होकर तीन वर्ष पर्यन्त ३% व्याहृति और गायत्री का जाप करता है वह परब्रह्म को प्राप्त होता है। वायुवत् स्वतंत्रचारी होकर शरीर बन्धन रहित हो जाता है।

चुनीचे बालक ने सन्यासी की आज्ञा का पालन कर ३ वर्ष तक जल में खड़े होकर गायत्री मंत्र का जाप किया जिसके प्रताप से चक्षुहीन होने पर भी अष्टाध्यायी महाभाष्य तथा चारों वेदों को ज्ञाता हुए और वह अपने समय में व्याकरण के दैदीप्यमान,

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri