इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextराज्य तथा परिवार मुर्दा का निवास है।
मनु जी ने धर्म के १० लक्षण कहे हैं।
चतुर्भिरपि चैवैतैनित्यमाश्रमिभिर्दिजैः।
दशलक्षणको धर्मः सेवितव्य प्रयत्नतः॥
धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयंशौचमिद्विनग्रहः।
धीविद्या सत्यमक्रोधो दशक धर्म लक्षणम्॥
मनु २/११.१२
अर्थ- चारों आश्रम द्विजों को दस लक्षण वाले धर्म का सेवन यत्न से करना चाहिए। १. धैर्य २. दूसरे की करी हुई बुराई को सह लेना ३. मन का रोकना ४. चोरी न करना ५. शुद्ध होना ६. इन्द्रियों का रोकना ७. शास्त्र का ज्ञान ८. आत्मा का ज्ञान ९. सत्य बोलना एवं १०. क्रोध न करना। ये धर्म के दस लक्षण हैं।
मातृवत्परदारांश्च परदव्याणि लोच्छवत्।
आत्मवत्सर्व भूतानि यः पश्यति स पश्यति॥
चाणक्य नीति १२/१३
अर्थ- जो दूसरों की स्त्रियों को माता के समान, दूसरे के धन को मिट्टी के समान और अपने समान सब प्राणियों को देखता है वही ठीक देखता है। जब सब मनुष्य इस प्रकार को आचरण करने लगे तो संसार में स्वयं शान्ति हो जाय। क्लेश युद्ध और वैमनस्य संसार से शीघ्र ही सिधार जायें।
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इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri