इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextसदैव के विबन्ध रोगी को त्रिफला (हरड, बहेड़ा, आंवला) समान भाग को दरदरा कूटकर नियम प्रकार सेवन करें। इससे पेट नेत्र तथा मस्तिसक रोग दूर होकर बाल सफेद नहीं होते और वृद्धावस्था भी समीप नहीं आती।
चैत्र वैशाख में ४ मासे त्रिफला चूर्ण ४ मासे शहद ज्येष्ठ, आषाढ़ में ४ मासे त्रिफला चूर्ण ४ मासे मुनक्का या गुड श्रावण, भद्रपद में ४ मासे त्रिफला चूर्ण १ मासे काला नमक आश्विन, कार्तिक में ४ मासे त्रिफला चूर्ण ४ मासे मिश्री मार्गशीर्ष पौष में ४ मासे त्रिफला चूर्ण १ मासे सीट माघ, फाल्गुन में ४ मासे त्रिफला चूर्ण १ मासे पीपल छोटी
शौच के लिए सबसे अच्छा स्थान अपने घर के अन्दर ही शौचालय बनवा लेना है, जो कि बिल्कुल हवादार हो और सुगमता से स्वच्छ हो सके। शौचालय बनवाते समय इस बात का अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि प्रातःकाल और दिन में उत्तर दिशा को मुख करके बैठ सकें और रात्रि को दक्षिण दिशा को मुख करके सुगमता से बैठ सकें।
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दन्तधावन
दंत शरीर की रक्षा का द्वार है इनके स्वस्थ रहने से शरीर स्वस्थ रहता है। सफेद दंत अच्छे लगते हैं, मैले पीले दंत देखकर घृणा होती है और मैल के कारण ही कौड़े लग जाते हैं।
अधिक गर्म अधिक ठंडा जल, प्रथम गर्म और पश्चात् ठंडा जल या पदार्थ, अधिक कड़ी वस्तु का चबाना खेंचना, तोड़ना, सोने, मन्त्र मुख में पान आदि रखकर सोना यह दंतों को रोगी बनाते हैं। दंतों की रक्षा के लिए कौन्ड नीम गौन्दनी और सिहोड़े को दातुन उत्तम है और दातुन को भली प्रकार चबाकर बारीक कूँची से हल्के हल्के दंत साफ करने चाहिए अन्त में दातुन को
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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