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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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चौर कर या जीवी आदि से जीभ को भी साफ करें ताकि जीभ के ऊपर का सफेद मैल सोफ हो जाय और मुख से दुर्गन्ध न आवे। मंजन कपूर देशी इमाराश, फिटकरी की खील १ तोला, सेलखड़ी पिसी हुई १० तोला सब को मिला कर पीस लें। रात्रि को सोते समय मंजन करने से दीर्घों को विशेष लाभ होता है और कौड़ा नहीं लगता।

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नेत्र

नेत्र बिन सुना संसार

शरीर में नेत्र कितना उपयोगी अंग है। इसके बिना मनुष्य जीवन व्यर्थ है। नेत्र हीन व्यक्ति न तो कोई प्राकृतिक दृश्य का सुख और आनन्द ले सकता है और न ही ईश्वरीय रचनाओं का। वह रूप, रंग, व्यक्ति, पशु, पक्षी आदि को केवल सुनकर ही अनुमान लगा लेगा। सत्य तो यह है कि नेत्र हीन होना सबसे बड़ा कष्ट है।

प्रातःकाल नेत्रों को शुद्ध और ताजे जल से भली प्रकार धोना चाहिए। काँच का ग्लास जो नेत्र धोने के लिए ही होता है। उसमें जल भर कर चाँक्या सूतों को खील २ रत्ती डाल कर उसमें नेत्रों को डुबाकर धोना चाहिए। नेत्र खुले रहें और २,३ मिनट तक डुबे रहें। ऐसा करने से नेत्रों के अनेक रोग नष्ट हो जाते हैं। यदि इस क्रिया का नित्य न कर सकें तो सप्ताह में दो बार अवश्य करें, रात्रि का नेत्रों में लगाने के लिए 'नेत्र मणि' उत्तम है। सोफ और लाल इलायची के दानों को मिलाकर भोजन के पश्चात् खाने से नेत्रों की ज्योति बढ़ती है और पान खाने की आदत भी छूट जाती है।

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इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri