इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextखाने को मिलें, पर वह विदेशी शासन की भुंखलाओं के बीच रहते हुए घी, दूध, और हलुआ-पूरी के सामने श्रेष्ठ है। लार्ड नार्थब्रुक ऐसे शब्द सुनकर चकित हो गया, जबकि भारत की जनता अपने घर में बैठकर भी स्वतंत्रता के शब्द का उच्चारण तो दूर रहा स्मरण भी नहीं कर सकती थी, उस समय देश का यह सन्यासी निर्भय होकर स्वतंत्रता के सच्चे सुख का अनुभव करे। परन्तु उस लार्ड का साहस न हुआ कि वह ऋषि दयानन्द सरस्वती को बन्दी बना सके। क्यों? क्योंकि ऋषि दयानन्द की निर्भयता, सच्ची देश भक्ति और चेहरे के तेज से वह भयभीत हो गया। लोकमान्य तिलक आदि देश भक्तों ने ऋषि दयानन्द सरस्वती द्वारा उच्चारित स्वतंत्रता शब्द को अपने रक्त से सींचा और जिसके फलस्वरूप हम आज स्वतंत्र हैं। यही नहीं ऋषि दयानन्द सरस्वती की विद्वत्ता की दुंदुभी भी सारे विश्व-मण्डल में बज गई और अब बज भी रही है, उनका लिखित सत्यार्थप्रकाश संसार की २८ भाषाओं में प्रकाशित हो चुका है और संसार की शेष सभी भाषाओं में सत्यार्थप्रकाश का अनुवाद हो रहा है। फ्रांस ने सत्यार्थप्रकाश को तीसरे नम्बर पर मान्यता दी है। अतएव मुझे इतना ही कहना है कि पूर्ण ब्रह्मचर्य द्वारा ही भारतवर्ष के सारे दुःख और क्लेश दूर हो सकते हैं। संसार के आगे सिर उठाने और गौरव बढ़ाने का साहस तभी हो सकता है कि जब संमस्त भारतवासी ब्रह्मचर्य के पालन करने में पूर्ण ध्यान देंगे। ब्रह्मचर्य का अर्थ अविवाहित होना नहीं है, परन्तु हर प्रकार से कम से कम युवकों को २५ वर्ष और युवतियों को १६ वर्ष तक वीर्य को खण्डित नहीं होने देना और पूर्णरूप से वीर्य की रक्षा करने को ही ब्रह्मचर्य कहते हैं।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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