इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextस्वप्नदोष नाशक चमत्कारिक बूँटी
जिन नवयुवकों को स्वप्नदोष होता ही रहता है, उन्हें चाहिए कि वह प्रातःकाल शौच, स्नानादि से निवृत्त होकर निराहार मुँह 'अपामार्ग' जिसे 'औंगा' भी कहते हैं, लम्बी शाख वाली जिस पर चावल से लगे रहते हैं, उसकी ताजा जड़ उखाड़ कर जल से मिट्टी साफ करके तीन अंगुल अर्थात् २ इंच अनुपात में लेकर मुख में रखकर धीरे-धीरे चबाकर रस चूसते जायें, बाद में फोकस को थूक दें। इसे आठ दिन निरन्तर सेवन करें। इसके सेवन से स्वप्नदोष जैसे भयंकर रोग से शीघ्र छुटकारा मिल जायगा। बाद में भी सप्ताह में एक दो बार बूँटी का सेवन करते रहा करें। अभूतपूर्व लाभ होगा। जड़ नित्य ताजा लेनी चाहिए।
विवाह
विवाह जीवन में बड़े महत्त्व का संस्कार है। इसी पर आगामी सन्तानोत्पत्ति तथा देशोन्मति निर्भर है। विवाह ही सृष्टि वृद्धि का साधन है तथा पारिवारिक सुख का एक मात्र द्वार है।
विवाह प्रेम तथा नवजीवन का आरम्भ है। इसके द्वारा पति और पत्नि दो शब्दों की उत्पत्ति होती है। विवाह के नाम से बच्चों के मुख पर हँसी आ जाती है। युवकों का हृदय विवाह के नाम से नव-प्रेम संचार की आशा तथा पूर्णसुख का अनुभव के लिए लालायित हो जाता है। युवतियों का मदन-कुमुद खिलने लगता है तथा लज्जा से नेत्र नीचे हो जाते हैं। यह विवाह सुख और आनन्द के आमोद-प्रमोद से भरा होता है। इसी कारण यह समारोह के साथ सम्पन्न होता है।
विवाह का उद्देश्य सुख के साथ पारिवारिक जीवन
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri