इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextव्यतीत करना है। परन्तु आजकल इसके सर्वथा विपरीत देखने में आता है। विरले ही पुरुष विवाह करके यथार्थ सुख को पाते हैं। विवाह का मुख्य उद्देश्य बलिष्ठ सन्तान उत्पन्न करके अपने परिवार देश तथा जाति को उन्नति की ओर अग्रसर करना है। बाल-विवाह से इस हेतु की पूर्ति नहीं हो सकती। बाल-विवाह के कारण ही विविध रोगों को उत्पत्ति हो गई है। सहस्रों बालक अकाल मृत्यु से पंचतत्व में विलीन हो जाते हैं। जिस देश में बच्चे बाल्यकाल में ही मृत्यु को प्राप्त हो जायें, वह देश आगे को कैसे उन्नति कर सकता है। बाल-विवाह ही के कारण सहस्रों बाल-विधवा स्त्रियाँ भारत को कर्त्तविकर रहती हैं। जो देश में वेश्याओं के रूप में पुरुषों से अपना प्रतिशोध लेती हैं। वह कहती हैं कि तुमने हमारा विवाह बाल्यकाल में ही कर दिया और जब हमारी आयु तरुणावस्था को प्राप्त हुई उस समय से पूर्व ही विधवा हो जाने पर घर से निकाल दिया। क्या पुरुष अपने अनेक विवाह नहीं करते हैं? तो हमें द्वितीय विवाह करने का अधिकार क्यों नहीं? हम वेश्या वृत्ति करके तुम्हारे पुरुषत्व को समय से पूर्व ही अपने हाव-भाव दिखाकर नष्ट कर देंगी।
मित्रों, आपको योग्य है कि आप अपने बच्चों का विवाह पूर्ण तरुणता प्राप्त होने पर ही करें अर्थात् युवकों का २५ वर्ष और युवतियों का १६ वर्ष से पूर्व विवाह न करें।
ऊन षोडश वर्षा याम प्राप्तः पंचविंशतिम्।
यद्याधत्ते पुमान गर्भं कृक्षिस्थः सविपद्यते॥
जातो वा न चिरं जीवेत् जीवेद्वा दुर्बलेन्द्रियः।
तस्मादत्यन्त बालायां गर्भाधानं न कारयेत्॥
सुश्रुत शरीर स्थान अ- १०
अर्थ- यदि २५ वर्ष से कम आयु का युवक १६ वर्ष से कम आयु की युवती के साथ समागम करता है तो गर्भ की स्थिति नहीं हो पाती। यदि गर्भ रह भी जाता है तो वह नष्ट हो
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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