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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)

Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)

Devanagarihipublished250 pages

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अनिन्दतैः स्त्री विवहैरनिन्द्या भवति प्रजा । निन्दन्तनिन्दिता नृणां तस्मान्निन्द्यानिवर्जयेत् ॥

मनु ३/८२

अर्थ- अच्छे विवाहों से अच्छी और बुरे विवाहों से बुरी सन्तान मनुष्यों के होती है। इस कारण निन्दित विवाहों का त्याग करें।

इसका अभिप्राय यह है कि व्यभिचार, अपहरण, दुराचार और बिना लक्ष के द्वारा जो सन्तान होती है वह दुष्ट प्रकृति का, धन तथा कर्म से होन, देश जाति को कलंकित करने वाली होती है, और जो विचार पूर्वक नियमानुसार संस्कारमय सन्तान होती है वह देश जाति के गौरव को द्विगुणित, चौगुणित करती है इसीलिए सुसन्तति के निर्माण हेतु ही संस्कारित विवाह के लिए वेद तथा मनु जी ने उपदेश किया है।

आजकल जिस प्रकार की पद्धति विवाह में चल रही है उसका एक उदाहरण यहाँ देते हैं, विद्वान् जन उसके दोषों को समझकर अपनी परिपाटी में परिवर्तन करें।

लाला श्यामलाल की एक पुत्री थी। जिसका नाम लक्ष्मी देवी था। उन्होंने उसे पश्चिमी पद्धति से शिक्षा दिलाई, लक्ष्मी बड़ी ही विचारशील, सभ्य और साथ ही भारतीय संस्कृति सभ्यता को भी भली प्रकार जानती थी। अपनी तीव्र बुद्धि के कारण गायनादि कला में भी पूर्ण पारंगत थी। लाला श्यामलाल ने अपने एक मित्र के लड़के के साथ उसका विवाह कर देना तय कर दिया। उस समय वह महोदय इंग्लैंड में आईन्सीएस० की तैयारी कर रहे थे। लक्ष्मी को घर के माता-पिता एवं सभी पारिवारिक जनों ने देखकर पसन्द कर लिया था।

लाला श्यामलाल के यहाँ बारात आ गई। रात्रि के तीन बजे वह महोदय कन्या के पिता के द्वार पर आ खड़े हुए। लाला श्यामलाल के पास अपना विजिटिंग कार्ड भेजा। लाला श्यामलाल

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

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