इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
by बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta)
Source: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (origin)
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Read in contextक्रोडा की तब इन्द्रिय सुख के लिए। आपने कभी इस विचार से क्रोडा नहीं की, कि आज हमें धर्मराज युधिष्ठिर, श्रीकृष्ण, अर्जुन, भीम और राम, लक्ष्मण जैसे पुत्र को जन्म देना है; पुत्र, पुत्री, ६ पत्नी, पापी, धनी, निर्धनी हर प्रकार की सन्तान उत्पन्न करने की सामर्थ्य परमपिता परमात्मा ने आपके हाथ में सौंपी है।
प्रश्न- क्या वास्तव में इच्छानुसार सन्तान उत्पन्न हो सकती है?
उत्तर- हाँ! हो सकती है। उत्तम सन्तान को बनाने के लिए उत्तमोत्तम संस्कारों की आवश्यकता है। जिस प्रकार एक सुनार सोने की डली को संस्कारों द्वारा सुन्दर आभूषणों में परिवर्तित कर देता है। उसी प्रकार यदि उत्तम रीति से उत्तम संस्कार होंगे तो बच्चा उत्तम होगा यदि संस्कार निकृष्ट होंगे तो बच्चा भी निकृष्ट होगा।
घुड़साल में घोड़े ही बैठेंगे मनुष्य नहीं। कूड़े के ढेर पर मच्छर, भुनगे ही आकर बैठेंगे भले मनुष्य नहीं, तो फिर निकृष्ट रजः - वीर्य से कैसे उत्तम सन्तान को आशा की जा सकती है। उससे तो निकृष्ट सन्तान ही होगी।
पुष्पं दृष्ट्वा फलं दृष्ट्वा
दृष्ट्वा योषित यौवनम्।
त्रीणि रत्नानि दृष्ट्वेव
कस्य नो चंचलते मनः॥
अर्थ- सुन्दर पुष्प को देखकर, सुन्दर फल को देखकर और सुन्दर युवती को देखकर, किसका मन नहीं मचलता।
पिता यस्य शुचिर्भूतो,
माता यस्य पतिव्रता।
द्वार्या यः सुनु रूत्पन्न
स्तस्य नो चंचलते मनः॥
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri