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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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महम्मदके धर्ममें भी सब प्रकारका नशा हराम है।

शराबीकी बुद्धि और अन्तःकरण अशुद्ध हो जाते हैं, उससे कदापि भजन नहीं हो सकता, यही कारण है कि, उसको ज्ञान नहीं मिलता।

पूरबके नीचोंकी सराब पीनेकी रीति—मछपोंकी, रीति है कि, मछ पीनेवाले इकट्ठे होते हैं मंडली बांधकर बैठ जाते हैं, शराबका प्याला हर एकके सामने रखा जाता है, सब लोग मदिराको अपनी उँगलीसे लगाकर माथेमें लगाते हैं, यह चन्दनका चिन्ह है पीछे राम राम कहके प्याला उठाते हैं, यह उस तोतेका चिन्ह हैं क्योंकि, तोता राम राम कहता है। तीसरे जब शराब पीकर उन्मत्त होते हैं, बक झक करते हैं ब्रह्मभूत लगे हुयेके समान चिन्ह प्रगट करते हैं। चौथे बेहोश होते हैं तो नालियों और गंदगियोंके जगह लेटते हैं, यह रीति पूरबदेशके नीच जातियोंमें मेरे सामने १८५९ में प्रचलित थी, इस समय कुछ खबर नहीं कि, है वा नहीं।

नरकका चिन्ह—शराबके अर्थसे प्रगट होता है कि, शराब वह चीज है जिसके पीनेसे बदमाशी और बरबादी प्रगट हो देशी बोलीमें भी इसको मछ कहते हैं, मछ नरकका चिन्ह है।

राक्षस—जब समुद्र मथा गया और शराब निकली यह राक्षसोंको दी गई, इसलिये जो मदिरा ग्रहण करता है वह राक्षस है।

टीटोटेलर (टेम्प्रेन्स) सोसायटी—अंग्रेजोंमें मछ त्यागियोंकी एक मण्डली है, जिसको टीटोटेलर सोसाइटी (Tetotalor Society) और टेम्प्रेन्स सोसाइटी भी कहते हैं। इस सोसायटीकी आज्ञा है कि, जो कोई इस सोसाइटीमें सम्मिलित हो, वह पहले सभी प्रकारके मादक पदार्थोंका त्यागकर इसी प्रकारका एक-रारनामा दाखिल करे कि, मैं आजसे किसी प्रकारका मादक पदार्थ न खाऊंगा, न खिलाऊंगा न दूंगा न दिलाऊंगा न बेचूंगा न बेचवाऊंगा। जो कोई इस प्रकारका प्रतिज्ञा पत्र देता है उसको सोसाइटीमें सम्मिलित करके एक परवाना देते हैं जिसको वह पुरुष अपने पास रखता है जिससे यह प्रमाणित हो कि, यह पुरुष टीटोटेलर सोसाइटीका मेम्बर है।

आधे मरे—मुझको याद आती है कि, मैं किसी लण्डनके अखबारमें पढ़ा था कि, लण्डन शहर नगरमें मछपोंकी गिनती हुई दो तीन वर्ष के बाद फिर जाँचकी गई तो जान पड़ा कि आधेके लगभग, मछप मर गये।

नशेके दोष—(१) नशेबाजका कोई विश्वास नहीं करता और न उसकी कुछ प्रतिष्ठा होती है न वह इस योग्य होता है। (२) नशाके सेवनसे