कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअन्तःकरण सब प्रकारके पापोंकी तरफ झुकता है। (३) नशेबाजोंके शरीरसे घृणित दुर्गन्धि आती है, मानो साक्षात् नरक जीवित होकर पृथिवीपर फिरता है। (४) नशेबाज दाम देकर लोक परलोककी अप्रतिष्ठा मोल लेता है। (५) तौरैतमें गिनतीकी किताबमें लिखा है कि, जो कोई स्त्री अथवा पुरुष शुद्ध हुआ चाहता है, तो उसे चाहिये कि, वह मदिरा तथा अंगूर आदिकके रससे अलग रहे (६) हूसिआ नबीकी किताबका ४ बाबकी ११ आयतको देखो, हरामकारी और शराब पीना अन्तःकरणकी चतुराई और बुद्धिको नष्ट कर देता है।
प्रतिष्ठित—लूकाकी इच्छीलका १ पहला बाब १५ आयतमें, यहिया नबीका हाल लिखा है कि, वह खुदावनकी नजरमें प्रतिष्ठित होगा जो अंगूरका रस तथा मद्य न पियेगा।
धिवकार तथा आफसोसके पात्र—एसिआ नबीकी किताबका ५ बाब २२ आयत देखो, उनपर धिवकार और आफसोस है जो शराब पीने और मादक पदार्थोंके सेवन करने तथा दूसरोंको सेवन करानेमें बली होते हैं।
अपराधी एसिआह नबीकी २८ बाब और ८ आयतमें देखो—मनुष्य नशासे पाप करते हैं, पाप करके दुखी होते हैं, डगमगाते हैं न्यायके स्थानमें अपराधी ठहरते हैं।
बुद्धिका नाशक—इस बात पर सभी जातियें सहमत हैं कि, बुद्धिही द्वारा लौकिक पारलौकिक सर्व प्रकारकी विद्या प्राप्त होती है, बुद्धिसेही कला कौशल आदि सर्व प्रकारकी चतुराइयाँ मिलती हैं, सांसारिक सुखसे लेकर मोक्ष तक सब सुख प्राप्त करानेवाली वस्तु बुद्धिही है। विचारना चाहिये कि मादक पदार्थोंसे जब बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है तो उसके सेवन करनेवालोंके लोक परलोकका क्या ठिकाणा ? मादक पदार्थके सेवनसे ऐसा अमूल्य पदार्थ बुद्धि नष्ट हो जाती है तो इससे बढ़कर दूसरा हराम क्या होगा ? इन्द्रियोंसे परे मन है, मनसे परे बुद्धि तथा बुद्धिसे परे आत्मा है आत्माके समीप रहनेवाली तथा समाचार देनेवाली बुद्धि नष्ट हो गई तो वहां के समाचार कौन कहेगा ? इस हेतु जब बुद्धि गई मृत्यु आई विपत्ति सिरपर पड़ी। क्योंकि भगवत्गीतामें लिखा है कि “बुद्धिभ्रंशात् पतिष्यति”।
मांसखोर मद्य नहीं पीते पर मद्य व मांस बिना नहीं रह सकते—मादक पदार्थोंका सेवन मांस आहारसे भी अधिक बुरा है क्योंकि प्रायः कितनेक मांस आहारी मांसको खाते हैं पर मद्य नहीं पीते। ऐसा कोई मद्यप नहीं जो मांस न