भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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खाता हो । इस प्रकार सर्वमद्यप मांस आहारी हैं, यही एक प्रमाण है कि मद्यपान पापों और घृणित कर्मोंका सरदार है । देखो, मुसलमान लोग मांस तो खाते हैं पर शराबियोंसे घृणा रखते हैं, उनकी मुहफिलमें कोई शराबी बैठने नहीं पाता, ऐसेही संयमी और साधुओंकी सङ्गतिमें भी मद्यप नहीं जा सकते

सुलेमान—सुलेमानके इन्सालका २३ बाब, २० आयत देखो उसमें लिखा है कि, तू उन लोगोंके साथ न हो जो मद्यप हैं ।

फिर इसी बाबके ३० आयतसे ३३ आयत तक लिखा है कि, जो देर तक मद्य पीते हैं जो मद्यकी खोजमें रहते हैं उनके ऊपर तथा जब लाल लाल छटा और रंगोंको दीखलाती हुई मदिरा दीख पड़े उसका आकर्षण तुम्हारे अन्तःकरणमें हो तो उसकी तरफ दृष्टि मत डाल, ध्यान मत दे । क्योंकि वह साँपके मानिन्द काटती है, बिच्छूके समान डङ्क मारती है ।

अनेकोंका मांस खाया—जिस समय शराब खींचनेके वास्ते पदार्थोंको सड़ानेके लिये भिगोते हैं तो उसमेंसे अगणित जीव उत्पन्न होते हैं फिर उसको भट्ठी में डालकर मद्य खींचते हैं तो उसके साथ उन कीड़ोंकाभी रस खिंच जाता है । वे सब कीड़े भट्ठीमें मरकर गल जाते हैं । उन्ही जीवधारियोंके अंशसे मदिरा तैयार होती है । जिसने एक गिलास शराब पी लिया उसने करोड़ों जीवधारियोंका मांस खा लिया । मदिराके बनानेमें अनन्त जीवोंकी हिंसा होती है, इस कारण मदिरा बनानेवाले, बेचने वाले और पीनेवाले सभी समान पापी हैं उनसे अच्छे मनुष्य घृणा करते हैं ।

मुहम्मद साहबके अक्षर तथा मद्यकी गन्धसे सभी तप नष्ट—मुहम्मद साहबके समयमें दैत्योंके रहनेकी जगह खैबर थी मुहम्मद साहबने अलीसे कहा कि, ज़िबराईल मेरे पास इस्मआजम लाये थे वह मुझसे सीख जाओ वहाँके खजानेसे धन ले जाओ, यदि तुमसे कोई सामना करे तो उससे लड़ो डरो मत । क्योंकि, इस्मआजम जिसके पास होता है उसकी सर्वदा विजय होती है । अली इस्मआजमको सीखकर वहाँ गये पर विजय प्राप्ति नहीं हुई, क्योंकि, उस गढ़में एक महात्मा रहता था, जिसकी रक्षामें वहाँके रहनेवाले थे । उसी महात्माकी कुपासे कोई किला ले नहीं सकता था । जब हजरत अली किलाको न जीत सके तो मुहम्मद साहबने उन्हें स्वप्नमें उपदेश दिया कि, ऐ अली ! इस शहरमें एक फकीर रहता है उसे किसी न किसी उपायसे शराब खानेके निकट ले जा उसकी नाकमें शराबकी गन्ध आवेगी तो उसका माहात्म्य जाता रहेगा । जागने के बाद अलीने वैसाही किया, उस फकीरकी नाकमें मदकी गन्ध पहुँचतेही

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