कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1018, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंउसका माहात्म्य जाता रहा, उसकी तपस्या और भजनका सब फल नष्ट हो गया। अलीने फिरसे गढ़पर चढ़ाई की, किलेको जीत लिया उस फकीरको भी कत्ल कर दिया। केवल शराबकी गन्धसे उसकी वर्षोंकी तपस्या और भजनका प्रभाव जाता रहा, जो नित्य मद्य पीते हैं उनकी क्या गति हो? यह बेही शोच लें।
फिरस्ते हारूत और मारूतकी शराबसे दुर्दशा—तफसीर अजीजीमें अबिन हरीरा व इब्र हातिम हाकिम, इब्र अब्बास व इब्र अबदुल्लाह और इब्र उम्र आदिकने कहा है कि, अदरीस पअम्बरके समय पापी लोग आसमान पर चढ़े फिरस्ते मनुष्योंसे घृणा करने लगे। खुदाने कहा कि, मनुष्योंमें काम और क्रोध भरा हुआ है, इस कारण उनका मन पापकी अर झुकता है, यहाँतक कि, यदि तुम पृथिवीपर भेजेजाओ तुममें कामक्रोध दिया जावे तो पाप करनेसे तुमभी नहीं बच सकोगे। फिरिस्तोंने खुदाके वचनपर विश्वास न किया कहा कि, हम पृथिवीमें जाकर किसी प्रकारका पाप न करेंगे। खुदाने कहा, तुम जपनेमेंसे ऐसे दो फिरिस्ते भेजो जिसके कि, बिगड़नेकी तुम्हें किसी प्रकारकी शंका न हो, फिरिस्तोंने अपनेमेंसे तपस्या और भजनमें सबसे अधिक प्रतिष्ठित हारूत और मारूत नामक फिरिस्ते खुदाके समक्ष उपस्थित किया। खुदाने उनको पृथिवीपर भेजा कि, तुम जाकर मनुष्योंको उपदेश करो, सावधान कोई पाप न करना। दोनों पृथिवीपर आये, मनुष्योंको उपदेश करने लगे। कुछ दिनोंके बाद एक महासुन्दरी पुंश्चली जुहरा नामक स्त्री पर दोनों आशक्त हो गये उससे अपने कामवृत्तिको प्रगट किया। उसने कहा कि, यदि तुम मुझे चाहते हो तो मेरी चार बातोंमेंसे किसी एकको स्वीकार करो। तब तुम्हारी इच्छा पूरी होगी। वह चार बातें यह हैं—प्रथम मेरे पतिको बद्ध करो, दूसरी—मेरे बुत्तको दण्डवत् करो, तीसरी—शराब पीओ, चौथी—मुझे इस्मआजम बतलाओ। उन्होंने सब तो महापाप समस्या पर मद्यका पीना सुगम समझकर पीलिया। जब मद्यका नशा चढ़ा तो उसकी प्रतिमाको भी दण्डवत् किया, उसके पतिको मारा, जोहराको इस्मआजम भी सिखला दिया। जुहरा तो इस्मआजमके बलसे आशमानको उड़ गई, पर खुदाने हारूत मारूतके पैरोंमें जंजीर बांधकर बाबुलके कुवेमें लटकवाय दिया। उनपर कयामतके दिन तक नित्य आगके कोड़े पड़ते रहेंगे, प्यासके मारे उनकी जिह्वा बाहर निकल आई है; जिह्वासे एक विलस्तके फासलेपर मीठे पानीका झरना बहता है, उनको वह पानी भी पीनेके लिये नहीं मिलता। वे दोनों शैतानोंको जादू सिखलाया करते हैं शैतान मनुष्योंको बहकाकर पाप लगाता है। शाह अबदुलअजीजे लिखा