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कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

by कबीर साहेब

Source: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished1,367 pages

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मकानका रास्ता भूलकर एक कबरिस्तानमें चला गया । उसी दिन शामको एक पारसीकी बूढ़ी स्त्री मर गई थी, उसको कफनदेकर सुगन्धी अतर आदिक लगाकर, कबरिस्तानके मकानमें रख आये थे । शाहजादा भी भटकता भटकता कबरिस्तानके उसी मकानमें आगया, नशेकी तरङ्गमें मृतक बूढ़ीकोही अपनी रत्री समझकर जगाना और गुद गुदाना आरम्भ किया पर वह मुरदा कब जागनेवाली थी ? न जागनेपर शाहजादेके मनमें विचार आया कि, आज प्रथम रात्रि है इस हेतु लज्जासे नहीं बोलता । पीछे उसके साथ सम्भोग करने लगा जवानीके जोशमें सबेरैतक भ्रष्ट होता रहा । इधर तो दिनका प्रकाश होने लगा उधर उसका नशा भी उतरने लगा, चेत आनेपर अपनेको कबरिस्तानमें एक बूढ़ी मृतकके साथ लिपटा तथा जिह्वा को उसके मुंहमें डाले हुये देख उसकी लज्जा और पछतावेको क्या कहना था, वह वहाँसे बड़ी चिन्ता, लज्जा, शोक, ग्लानि और घृणाको लिये हुये वहां से चल दिया ।

मदिराके दोषोंपर पाश्चात्य तत्त्वज्ञ—यूरोपियन तत्त्वज्ञोंकी सम्मति है कि, मदिराका नशा सार भागके आधारपर है, यह कारबन, हैड्रोजन और आक्सिजन इन तीन तत्त्वोंसे बनता है ।

कीमियाइस्लाइमें लिखा है कि, दो भाग आक्सिजन, छः भाग हैड्रोजन और चार भाग कारबनसे अलकाहल बनता है । उसका यह गुण है कि, शारीरिक उष्णतापर रक्तकी सञ्चारण गतिको बहुत जोरसे बढ़ाता है, जिससे थोड़ीही देरमें चर्मपर पसीना आजाता है । शरीरकी बिजली घट जाती है, इसका यह नतीजा होता है कि यह आरोग्यताको एकदम नष्ट कर देता है ।

इसका असर मस्तिष्कपर भी पड़ता है कि, यह मस्तिष्कके रगोंमें गरमी डालकर बड़े वेगसे रक्तका सञ्चालन करता है, जिसे मस्तिष्कके ऊपर बड़ा दबाव पड़ता है । थोड़े दिनोंके पीछे मस्तिष्कका तत्व ढीला होजाता है ।

मस्तिष्ककी शाखायें पतली पतली नसें हैं जिनपर मनुष्य की प्रकृति और स्वभावका आधार है वे बिगड़ जाती हैं इसका यह परिणाम होता है कि, मध्यम मनुष्य लड़ाका, झगड़ालू, डरपोक और उत्साह हीन हो जाता है । शरीरके पुट्टोंपर रसदार पदार्थोंको जमानेके कारण उनको बेकार कर देता है शराबियोंके पुट्टे प्रायः ऐसे हुये होते हैं । उनको थोड़ा परिश्रम भी बहुत कठिन जान पड़ता है, हाथ पग अपने वश नहीं रहते, अन्तमें थर थराहटकी बीमारी हो जाती है ।

उसका हड्डियोंपर ऐसा असर होता है कि, उनमें फासफोरस उत्पन्न